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खराब मौसम के कारण देर शाम तक घर नहीं पहुंच सका गुरजीत का शव

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खराब मौसम के कारण घर नहीं पहुंचा गुरजीत का शव
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शनिवार को होगा अंतिम संस्कार, परिवार के लोगों का रो रोकर बुरा हाल
फोटो-33, सैनिक गुरजीत के घर सांत्वना देने पहुंची महिलाएं
अमर उजाला ब्यूरो
खुटार।
पहाड़ पर खराब मौसम के कारण सैनिक गुरजीत सिंह का पार्थिव शरीर शुक्रवार शाम तक घर नहीं पहुंच सका। देर रात उसका शव घर पहुंचने के कारण अब शनिवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। खुटार के गांव पुनौती निवासी 10वीं सिख रेजीमेंट की 10वीं बटालियन के सैनिक गुरजीत सिंह की बृहस्पतिवार को पिथौरागढ़ के डीडीहाट में एक हादसे में मौत हो गई थी। ड्यूटी के दौरान जवान की मौत हो जाने की सूचना सैन्य अधिकारियों ने गुरजीत के परिवार के लोगों को दी थी।
गुरजीत सिंह के फुफेरे भाई खुटार के गांव टोडरपुर के पूर्व प्रधान मंजीत सिंह ने बताया कि शाम पांच बजे उनकी गुरजीत का शव लेकर आ रहे सेना के लोगों से बात हुई थी। वे लोग टनकपुर से 80 किमी पीछे थे। अधिकारियों ने बताया कि पिथौरागढ़ में मौसम खराब होने की वजह से जवान के पार्थिव शरीर को लाने में ज्यादा समय लग गया है। बनवसा से गुरजीत के शव को दूसरी एंबुलेंस से लेकर सेना के जवान देर रात तक गांव पुनौती पहुंचेंगे। शनिवार सुबह आठ बजे गुरजीत का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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फोटो-33,पुत्र गुरजीत सिंह की मौत से बेहाल मां सरजीत कौर
फोटो-34पति के गम में पत्नी मंदीप कौर की हालत भी खराब
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फोटो-36,गुरजीत के पिता को सांत्वना देते विधायक चेतराम
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कई नेता पहुंचे, परिवार को दी सांत्वना
खुटार। ड्यूटी के दौरान बृहस्पतिवार को गुरजीत सिंह की मौत हो जाने की सूचना पर शुक्रवार को कई नेता उसके घर पहुंचे और दुखी परिवार को सांत्वना दी। विधायक चेतराम, भाजपा के जिलाध्यक्ष राकेश मिश्रा, उपाध्यक्ष रजनीश दीक्षित, पूर्व जिलाध्यक्ष सत्यभान सिंह भदौरिया, पूर्व सांसद मिथलेश कुमार, खुटार नगर पंचायत अध्यक्ष अनुपम शुक्ला, खुटार के पूर्व ब्लॉक प्रमुख मनोज त्रिवेदी, पूर्व उप ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख पाल सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सतीश वर्मा सहित तमाम नेता गुरजीत सिंह के घर पहुंचे और दुखी परिवार को सांत्वना दी। एसडीएम मोइनुल इस्लाम, सीओ जितेंद्र सिंह, खुटार एसओ राहुल सिंह ने भी गुरजीत के घर पहुंचे।
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शहीद द्वार बनने की बात कहा करता था गुरजीत
खुटार। गुरजीत सिंह के दोस्तों ने बताया कि गुरजीत बेहद ही हंसमुख और मिलनसार था। वह जब भी वह छुट्टी पर गांव आता था तो अपने दोस्तों और पास पड़ोस के लोगों के घर मिलने जरूर जाता था। गुरजीत जब भी दोस्तों के बीच बैठता तो मजाक करता हुआ कहा करता था कि अब तो अपने गांव से 14 लोग आर्मी में चले गए हैं। किसी न किसी के नाम से यहां शहीद द्वार जरूर बनेगा। गुरजीत की याद कर दोस्तों की आंखें नम हो उठती थीं।
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माता पिता का बहुत ख्याल रखता था गुरजीत
खुटार। गुरजीत के भाई गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उसका बड़ा भाई बेहद नेकदिल और लोगों की मदद करने वाला था। वह मां और पिता का बहुत ही ख्याल रखता था। जब भी समय मिलता गुरजीत घर फोन कर पिता और मां का हालचाल जरूर लेता था। गुरप्रीत को फोन करता तो पिता, मां कर पूरा ख्याल रखने का निर्देश देता था। आठ दिन पूर्व मोबाइल पर हुई बात में पिता बलवीर सिंह गर्मी ज्यादा होने की बात कही थी। इस पर गुरजीत ने भाई को फोन कर बताया था कि वह उसके बैंक एकाउंट में राशि डाल रहा है। रुपये निकाल कर पिता और मां के लिए दो सोलर प्लेट और बैटरी आदि लगाकर गर्मी से बचने के लिए पंखे लगवा दे। जानकारी देते हुए भाई की याद कर गुरप्रीत सिंह फफक फफक कर रो पड़ा।
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बहुत ही दिलेर था गुरजीत
खुटार। गांव के लोग बताते हैं कि गुरजीत सिंह बहुत ही दिलेर था। जब उसकी पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में हुई तो परिवार और रिश्तेदार चिंतित हो उठे थे। तब गुरजीत ने परिवार वालों को तसल्ली दी थी कि चिंता न करें, उसे कुछ नहीं होगा। बाद में उसका तबादला पिथौरागढ़ हुआ तो परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि पिथौरागढ़ में मौत गुरजीत का इंतजार कर रही है।
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