शाहजहांपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का युवाओं को संदेश है कि खूब खेलो, लेकिन मोबाइल पर नहीं, मैदान में। युवा भी खेलना चाहते हैं लेकिन खेल मैदान और संसाधनों की कमी के चलते खेल नहीं पा रहे हैं। जिला युवा कल्याण विभाग ने तो खेल कराने ही बंद कर दिए हैं। ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को तलाशने और तराशने का काम जिला युवा कल्याण विभाग पर ही है। पहले हर साल ब्लाक स्तर पर खेलों के माध्यम से 16 वर्षीय बालक-बालिकाओं का चयन कर उनके बीच खेल प्रतियोगिताएं कराई जाती रही हैं। ब्लाक स्तर के विजेताओं को जिला स्तर पर अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन का मौका मिलता था, लेकिन दो सालों से ग्रामीण खेलकूद बंद ही कर दिए गए हैं।
बता दें कि वर्ष 2008-09 में भारत सरकार के खेल मंत्रालय ने पंचायत युवा क्रीड़ा एवं खेल अभियान (पायका) के नाम से योजना चलाई थी। इस योजना के तहत ब्लाक स्तर पर 16 वर्ष के बालक, बालिकाओं के खेलकूद कराए गए। ब्लाक स्तर के बाद जिला स्तर पर ग्रामीण खेल प्रतिभाओं ने दमखम दिखाया। इसके बाद राज्य स्तर पर भी प्रतियोगिताएं होती रहीं। इस योजना के तहत 4500 की आबादी वाले गांवों में लगभग 167 खेल मैदान भी विकसित किए गए और उनमें खेल उपकरण भी लगाए गए। लगभग पांच साल बाद यानी मार्च, 2014 में पायका योजना बंद कर उसके स्थान पर राजीव गांधी खेल अभियान की शुरुआत हुई।
राजीव गांधी खेल अभियान (आरजीके) के अंतर्गत कलान और पुवायां में स्टेडियम के लिए जमीन तलाशी गई। लगभग छह-छह एकड़ जमीन विभाग को उपलब्ध कराई गई। विभाग से स्टेडियम बनाने का प्र्रस्ताव भी मुख्यालय भेजा जा चुका है, लेकिन किसी खेल का आयोजन नहीं हो सका। आरजीके योजना के बाद मई 2016 से खेलो इंडिया योजना शुरू की गई, लेकिन हैरत की बात यह है नाम के अनुरूप इस योजना में अब तक एक भी खेल नहीं कराया जा सका है। दो सालों से ग्रामीण खेलकूद नहीं होने से प्रतिभाएं में कुंठित हो रही हैं। उन्हें आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल रहा है। गांवों के खिलाड़ियों को भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खेलों को बढ़ावा देने के लिए जरूर कुछ करेंगे, तभी तो खेलो इंडिया का नारा सार्थक हो पाएगा।
40 हजार रुपये मिले, जो नाकाफी हैं
ग्रामीण खेलकूद दो साल से बंद हैं। बजट के अभाव में खेलकूद नहीं कराए जा सकते। जिला योजना से सिर्फ 40 हजार रुपये स्वीकृत कराए गए हैं, जो जिला स्तर पर खेलकूद के लिए नाकाफी है, क्योंकि सभी ब्लाकों से आने वाले खिलाड़ियोें को किराए-भाड़े, खानपान से लेकर पुरस्कार तक उपलब्ध कराने पड़ते हैं। ग्रामीण स्तर पर एथलेटिक्स, वॉलीबाल, कबड्डी, भारोत्तोलन और कुश्ती की प्रतियोगिताएं करानी होती हैं। पुवायां और कलान स्टेडियम के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
- सत्येंद्र सिंह, जिला युवा कल्याण अधिकारी