माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटर परीक्षा (यूपी बोर्ड) शांतिपूर्वक ढंग से चयनित 154 केंद्रों पर शुरू हो गई। पहले दिन कोई नकलची नहीं पकड़ा जा सका, अलबत्ता केंद्रों पर कक्ष निरीक्षकों की भारी कमी रही। एक अनुमान के मुताबिक जिले में करीब डेढ़ हजार कक्ष निरीक्षकों की कमी रही। कक्ष निरीक्षकों की कमी पूरी कराने के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी से कहा गया है। कक्ष निरीक्षकों की कमी का मुख्य कारण अधिकांश कालेजों द्वारा शिक्षकों को रिलीव नहीं किया जाना और वित्तविहीन शिक्षकों का ड्यूटी नहीं करना माना जा रहा है। कुछ केंद्रों पर हालत यह थी कि प्रश्नपत्र के पैकेट खोलने के समय भी दूसरे स्कूल के शिक्षक मौजूद नहीं हो सके।
यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन विभाग और प्रशासन की जुगलबंदी ने अपना पूरा काम किया। अधिकारी सभी तहसीलों में दबदबा बनाने में कामयाब रहे। यह अलग बात है कि पहले दिन कोई नकलची नहीं पकड़ा जा सका, लेकिन लगातार सचल दलों समेत प्रशासनिक अधिकारियों के भ्रमण से न सिर्फ केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्वक चली, बल्कि शिक्षा माफिया भी माहौल को भांपने की कोशिश में ही जुट पाए। परीक्षा के पहले दिन जो बात चिंताजनक रही, वह थी कक्षनिरीक्षकों की भारी कमी। कुछ प्रधानाचार्यों ने अपने शिक्षकों को ड्यूटी लगे केंद्रों के लिए रिलीव नहीं किया, वहीं बड़ी संख्या में वित्तविहीन शिक्षक भी ड्यूटी करने नहीं पहुंचे।
इस संबंध में प्रभारी डीआईओएस रणवीर सिंह ने प्रधानाचार्यों से कहा है कि वह अपने कॉलेजों के शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त कर परीक्षा में ड्यूटी के लिए निर्देशित करें, ताकि परीक्षा सुचारू ढंग से संपन्न कराई जा सके। यदि प्रधानाचार्य इस कार्य में लापरवाही करेंगे तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इधर, हाईस्कूल हिंदी के पेपर में पहले दिन ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अनुपस्थित हो गए। परीक्षा के लिए हाईस्कूल में कुल 52172 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जिसमें 44370 परीक्षा में शामिल हुए। इस तरह पहले दिन 7802 परीक्षार्थी अनुपस्थित हो गए। प्रथम पाली में इंटर सैन्य विज्ञान के पेपर में एक परीक्षार्थी ही पंजीकृत था, वह भी गैरहाजिर रहा।
अनुपस्थिति के लिए ऑनलाइन व्यवस्था हुई फेल
बोर्ड परीक्षा के दौरान अनुपस्थित परीक्षार्थियों की स्थित को बोर्ड कार्यालय में तत्काल उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की गई थी, इसके लिए बाकायदा केंद्र व्यवस्थापकों को सिम, पासवर्ड और यूजरनेम उपलब्ध कराए गए थे, जिससे केंद्र व्यवस्थापक अनुपस्थिति का विवरण परिषद कार्यालय को मुहैया करा सकें और शिक्षा माफियों के अरमानों पर पानी फेरा जा सके। इसके लिए बाकायदा केंद्र व्यवस्थापकों को प्रशिक्षित भी किया गया था। केंद्र व्यवस्थापकों को बारकोड के माध्यम से डेटा स्कैन कर परिषद मुख्यालय भेजना तय हुआ था, लेकिन जब पेपर शुरू हुए तो यह व्यवस्था पहले दिन ही ध्वस्त हो गई।