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दक्ष-सती प्रसंग सुन आनंदित हुए श्रोता

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शाहजहांपुर। खिरनीबाग रामलीला मैदान में चल रही श्री शिव महापुराण कथा में सोमवार को कथा व्यास प्रशांत प्रभु ने सती और कामदेव प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
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उन्होने छठे दिवस राजा दक्ष, सती और शिव प्रसंग को आगे बढ़ाया। कहा, दक्ष प्रजापति के हवन अनुष्ठान में सती अपने पति शिव का अपमान सहन नहीं कर सकी और पवित्र हवन कुंड में ही अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इससे दुखी होकर भगवान शिव ने समाधि लगा ली और घोर तपस्या में लीन हो गए। बाद में सती ने राजा हिमालय के यहां पुत्री रूप में जन्म लिया। भगवान शिव की तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को भेजा गया। कामदेव भगवान भोलेनाथ की तपस्या भंग करने में सफल रहे। इससे क्रोधित होकर शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया। पति के भस्म होने के बाद उनकी पत्नी ने भोेलेनाथ से विनती की कि उसके पति को लौटा दे, इस पर शिव ने आश्वासन दिया कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण के रूप में कामदेव फिर जन्म लेंगे। पूर्व में व्यास पीठ का पूजन किया गया।
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