शाहजहांपुर। स्ट्रोक, दिमाग में संक्रमण समेत कई कारणों से होने वाले मिर्गी के रोग में देसी इलाज नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक लगभग 70 प्रतिशत मरीज नियमित इलाज से स्वस्थ हो जाते हैं। अंधविश्वास या बगैर जांचे-परखे इस्तेमाल किए जाने वाले देसी नुख्सों से मरीज को नुकसान हो सकता है।
पर्पल मिर्गी दिवस 26 मार्च को मनाया जाता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के मन कक्ष में रोजाना ही सौ से ज्यादा मरीज उपचार कराने के लिए आते हैं। इसमें चार से पांच मरीज मिर्गी की समस्या से ग्रस्त होते हैं। बच्चों से लेकर 20 से 30 वर्ष की उम्र वाले भी रोग से परेशान होते हैं।
मनोचिकित्सक डॉ.अभिनव रस्तोगी बताते हैं कि मिर्गी का रोग जन्मजात या अनुवाांशिक भी होता है। दुर्घटना या प्रसव के दौरान सिर में चोट लगने पर मिर्गी की समस्या हो सकती है। इसी तरह मस्तिष्क में संक्रमण, स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर भी मिर्गी की वजह बन सकता है।
मिर्गी का दौरा आने पर क्या करें
- मरीज को करवट से जमीन पर लिटाएं
-सिर के नीचे मुलायम चीज रखें
- यदि कपड़े तंग हो तो ढीले कर दें।
- मुंह में चाबी, जूता या अंगुली आदि कुछ नहीं डालें।
- घबराएं नहीं, भीड़ भी न लगने दें।
-पांच मिनट से अधिक दौरा रहे तो तुरंत अस्पताल लेकर जाएं।
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मिर्गी में एंटी एपिलेप्टिक दवाओं के नियमित सेवन से 70 प्रतिशत दौरे नियंत्रित हो जाते हैं। इसकी दवाएं अचानक से बंद करना खतरनाक हो सकता है।
-डॉ. अभिनव रस्तोगी, मनोचिकित्सक, राजकीय मेडिकल कॉलेज