वित्तीय वर्ष 2014-15 समाप्त होने की कगार पर है। विभिन्न विभागों की ओर से साल भर में पूरे न होने वाले कार्यों को आननफानन में पूरा कराया जा रहा है। इससे निर्माण की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि अधिकांश विभाग शासन से मिली धनराशि को निर्माणकार्यों में किसी भी तरह से खपाना चाहते हैं। पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनने वाली सड़कों का निर्माण कार्य धनाभाव में पूरा नहीं हो पा रहा है। इससे जिले में 59 सड़कें अधूरी पड़ी हुई हैं। इन सड़कों के निर्माण कार्य पूरा कराने को चाहिए 39.63 करोड़ रुपये की जरूरत है।
पीडब्ल्यूडी के पीएमजीएसवाई के निर्माण खंड-दो में तीन वित्तीय वर्षों की 59 सड़कें अधूरी पड़ी हैं। धनाभाव के चलते सड़कों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। खोदकर डाली गई सड़कों और गिट्टी आदि डालकर छोड़ देने की वजह से निर्माण क्षेत्रीय लोगों को गुजरने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वित्तीय वर्ष 2012-13 से लेकर 2014-15 की 59 सड़कों का निर्माण कार्य अटका पड़ा है। इन सड़कों के निर्माण के लिए 72.28 करोड़ रुपये की जरूरत है, जबकि अब तक केवल 32.65 करोड़ रुपये ही जिले को मिल सका है। अब 39.63 करोड़ रुपये और चाहिए, जिससे अधूरी पड़ी सड़कों का निर्माण कार्य पूरा किया जा सके। धनराशि के लिए जिले से प्रस्ताव भी भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद भी अब तक धनराशि प्राप्त नहीं हो सकी।
मानकानुसार एक साल में बन जाए सड़क
विभागीय इंजीनियरों के अनुसार प्रत्येेक सड़क का निर्माण एक साल के अंदर पूरा हो जाना चाहिए। इससे सड़क गुणवत्तापूर्वक तरीके से बन जाती है। अधिक समय लग जाने से सड़क की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है, जिससे सड़क जल्दी टूट जाती है। इसी वजह से ठेकेदारों से भी एक वर्ष में निर्माण कार्य पूरा कराने का अनुबंध किया जाता है।
सड़कों की वित्तीय वर्षवार स्थिति
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वित्तीय वर्ष सड़कें स्वीकृत (धनराशि) (प्राप्त धनराशि)
2012-13 04 307.72 लाख 180.30 लाख
2013-14 37 5239 लाख 2900 लाख
2014-15 18 1682 लाख 185 लाख
कुल 59 7228.72 लाख 3265.30 लाख