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जिला योजना के लिए 392.98 करोड़ के प्रस्ताव मंजूर

Thu, 02 Apr 2015 12:07 AM IST
शाहजहांपुर।
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 वित्त वर्ष 2015-16 में जिला योजना के 392.98 करोड़ से अधिक धनराशि के परिव्यय को प्रदेश के पर्यटन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने बुधवार को स्वीकृति दे दी। विकास भवन सभागार में तीन घंटे तक चली जिला योजना समिति की बैठक में विभागवार परिव्यय का आकलन शुरू हुआ तो जन प्रतिनिधियों ने इसी योजना के तहत बीते वित्त वर्ष में कराए गए कामों को लेकर ताबड़तोड़ सवालों की बौछार शुरू कर दी। खड़े होकर जवाब देते वक्त कई अफसरों की घिग्घी बंध गई तो प्रभारी मंत्री ने इमानदारी से काम करने का पाठ पढ़ाते हुए जन प्रतिनिधियों का गुस्सा शांत किया।
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बीते साल 172 करोड़ की जिला योजना के सापेक्ष इस बार बजट दोगुने से भी ज्यादा हो गया। दरअसल, अभी तक विभाग वार अनुमोदित धनराशि में केवल राज्यांश शामिल किया जाता था। इस बार जिला योजना में केंद्रांश के परिव्यय को भी शमिल कर लिए जाने से 47 विभागों का कुल परिव्यय बढ़कर 392.98 करोड़ हो गया। परिव्यय को स्वीकृति मिलने से पहले नगर विधायक सुरेश कुमार खन्ना ने प्रभारी मंत्री से समस्त धनराशि शासन से दिलाने की गारंटी मांगी।
विधायक खन्ना ने कहा कि गत वित्तीय वर्ष में शासन से कई विभागों को स्व्ीकृत धनराशि नहीं मिली और जिन्हें मिली, उनके बजट से कटौती कर ली गई। उन्होंने कहा कि परिव्यय को स्वीकृति तभी सार्थक होगी, जब शासन से उतनी ही धनराशि भी जारी हो। उन्होंने कहा कि जिले के विकास के लिए योजना में मांगी गई धनराशि दिलाने में वह शासन स्तर पर प्रयास करेंगे।
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जन प्रतिनिधियों से बचने का मतलब अपने पाप छिपाना
जल निगम द्वारा खराब पड़े इंडिया मार्क हैंडपंपों की री-बोरिंग, खराब पड़े नलकूपों की मरम्मत, ग्रामीण विद्युतीकरण, नहरों से सिंचाई सुविधा, समाज कल्याण विभाग की पेंशन योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही को मुद्दा बनाकर विधायक खन्ना समेत सांसद कृष्णा राज, सपा विधायक राजेश यादव, बसपा विधायक रोशन लाल वर्मा आदि खूब मुखर हुए। जन प्रतिनिधियों ने एक स्वर से शिकायत की कि उपरोक्त सारे कामों के प्रस्ताव उनसे लेने के बजाय अफसरों ने मनमाने तरीके से काम कराए।
जनता के नुमाइंदों ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने पैड पर जो भी प्रस्ताव दिए, उन्हें अनदेखा किया गया। इससे प्रभारी मंत्री का भी पारा चढ़ गया। अफसरों पर आंखें तरेरते हुए सवालिया अंदाज में बोले, प्रस्ताव बनाते वक्त जनप्रतिनिधियों से बचने की कोशिश क्यों करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करने का मतलब है, अपने पापों (गलत कामों) को छिपाना। प्रभारी मंत्री ने ऐसी सभी दिक्कतों के समाधान के लिए डीएम शुभ्रा सक्सेना और सीडीओ महेंद्र बहादुर सिंह को विभागीय सलाहकार समितियों की नियमित बैठकें करके जन प्रतिनिधियों से फीड बैक लेने के निर्देश दिए। बैठक में मौजूद पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा ने भी अफसरों को ईमानदारी से काम करने की नसीहत दी। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष नीतू सिंह, पुवायं की विधायक शकुंतला देवी भी मौजूद रहीं।

फसली सर्वे में धांधली का उठा मुद्दा
जिला योजना समिति ने फसली सर्वे में की जा रही धांधली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। शुरुआत सत्ता पक्ष जिला पंचायत सदस्य नीरज मिश्र ने की और उनकी बात का समर्थन अन्य कई विधायकों ने किया। सीडीओ और एडीएम पीके श्रीवास्तव ने सर्वे संबंधी शिकायतें मिलने पर जांच की बात की तो सदन में सवाल उछला कि जांच होती रहेगी तो मुआवजा कब बंटेगा। प्रभारी मंत्री ने चर्चा को यह कहते हुए रोका कि कुछ लेखपाल वाकई बहुत हरामी हैं। उन्हीं के किए का नतीजा ऐसी शिकायतों के रूप में सामने आता है।

मछुआरा समुदाय के आवासों की होगी जांच
मत्स्य विभाग द्वारा बनवाए गए मछुआरों के आवासों के बारे में प्रभारी मंत्री ने पूछा कि यह आवास किसकी स्वीकृति से दिए गए। संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर उन्होंने सीडीओ को जांच केनिर्देश दिए। इसी तरह विधायक खन्ना ने भावलखेड़ा ब्लॉक के नगरिया वहाब गांव स्थायी रूप से बंद पड़े नलकूप का हवाला दिया तो विभागीय एईएन ने उसे चालू बताया। खन्ना ने एईएन के कथन के चुनौती दी तो प्रभारी मंत्री ने सीडीओ से नलकूप की जांच कराने को कहा।
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