शाहजहांपुर। एडीएम प्रशासन वंदिता श्रीवास्तव ने दून इंटरनेशनल स्कूल में लिंटर ढहने से हुए हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच पूरी कर ली है। जांच में इस हादसे से पहले और बाद में कई विभागों की लापरवाही उजागर हुई है।
गत 14 अक्टूबर 2018 को थाना रामचंद्र मिशन क्षेत्र के मोहल्ला अहमदपुर रेती में नेशनल हाईवे किनारे बाबा ढाबा के पीछे निर्माणाधीन स्कूल का लिंटर गिरने से ठेकेदार समेत 12 मजदूर मलबे में दबकर घायल हो गए थे। इसमें रौसरकोठी निवासी मनोज शर्मा, चकभिठारा निवासी परमेश्वर दयाल, मकरंदपुर निवासी विनय की उसी दिन मौत हो गई थी, जबकि अगले दिन कटिया रज्जब निवासी विजयपाल की और तीसरे दिन मकरंदपुर निवासी विजय प्रताप उर्फ डब्लू ने दम तोड़ दिया। इस मामले में विनियमित क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर रामवीर सिंह ने स्कूल प्रबंधक घूरन तलैया निवासी ब्रजेंद्र सिंह साहनी, आरंभ एसोसिएट के आर्किटेक्ट जसदीप सिंह लांबा, हथौड़ा बुजुर्ग निवासी राजीव ठेकेदार, गोरखपुर निवासी इंजीनियर नीरज गौतम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
विवेचना के बाद पुलिस ने ठेकेदार राजीव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस बीच, डीएम अमृत त्रिपाठी ने एडीएम प्रशासन को घटना की मजिस्ट्रेटी जांच सौंपी थी। एडीएम के समक्ष सभी पक्षों के 17 लोगों ने उपस्थित होकर साक्ष्य और कथन नोट कराए थे। एडीएम वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि जांच के दौरान कई ऐसे नाम भी प्रकाश में आए, जिनका आरंभिक तौर पर उल्लेख नहीं किया गया था। बाद मेें ऐसे लोगों को बुलाकर उनके भी बयान कलमबंद किए गए। जांच रिपोर्ट डीएम को प्रस्तुत होने तक उसका विस्तृत ब्योरा देने से इंकार करते हुए एडीएम ने कहा कि इतना तय है कि इस हादसे के लिए कई विबाग दोषी हैं। यदि संबंधित विभाग सजग होते तो हादसे को टाला जा सकता था और मृतकों-घायल पक्ष के लोगों को पर्याप्त मुआवजा देना भी संभव था।