सावधान! सर्दी में बच्चों को निमोनिया, कोल्ड डायरिया का खतरा
सांस तेज चलने और एक से अधिक बार दस्त आने पर डॉक्टर को दिखाएं
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। सर्दी के इस मौसम में जैसे-जैसे पारा नीचे गिर रहा है, वैसे ही बच्चों को जुकाम, दस्त होना एक समस्या शुरू हो जाती है। यह बीमारी कब घातक बन जाए, कहा नहीं जा सकता। यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती, तो मामूली सी दिखने वालीं ये बीमारियां जानलेवा हो सकती हैं। सर्दियों के मौसम में सबसे ज्यादा खतरनाक कोल्ड डायरिया है।
सही समय पर इन लक्षणों की पहचान कर बच्चों को सर्दी से बचाया जा सकता है। यदि बच्चे की सांस तेज चलना, पसली चलना, स्तनपान न कर पाना, सांस में घड़घड़ाहट होना और अंगों का शिथिल व सुस्त हो जाना, बेहोश होना या झटके आना निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बिना देर किए बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। यदि बच्चे हो 24 घंटों में तीन या उससे अधिक दस्त आए हों, जिसमें पानी की मात्रा अधिक हो और मां के अनुसार शिशु के मल त्याग की आवृत्ति सामान्य से कहीं ज्यादा हो, बच्चा सुस्त हो और उसकी आंखें धंसी हुई हों, उसको कुछ भी पी पाने में कठिनाई हो रही हो और पेट की त्वचा चुटकी भरने पर बहुत धीरे से वापस जाती हो, ऐसा होने पर भी डॉक्टर के पास ले जाएं। इस मौसम में होने वाली आम बीमारियों का खतरा रहता है, जिनमें निमोनिया व डायरिया प्रमुख है।
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इन बातों का रखें ख्याल-
-बच्चें को सर्दी के मौसम में खुले में न ले जाएं।
-शरीर व सिर को गरम ऊंनी कपड़े से ढक कर रखें।
-सरसों के तेल में लहसुन, अजवाइन गरम करके मालिश करें।
-रात को सोते समय ध्यान रखें की बच्चा रजाई या कंबल से बाहर तो नहीं है।
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बदलते मौसम के साथ निमोनिया व डायरिया दोनों ही बीमारियों को लेकर इस समय में अपने बच्चों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। माताएं अपने बच्चों को छह माह तक केवल स्तनपान कराएं। और इसके बाद पूरक आहार दे सकती हैं। इससे बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता बनेगी। शिशु को छूने से पहले और बच्चे को भोजन खिलाने से पहले हाथ साबुन से धोएं।
- डॉक्टर एयूपी सिंहा, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल