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राजकाज की रफ्तार को लेखपालों की हड़ताल का पलीता

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कामकाज की रफ्तार को लेखपालों की हड़ताल का पलीता
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लेखपालों के कार्य बहिष्कार से कई कामों में आया ठहराव
सरकार की प्राथमिकता सूची में शामिल तमाम कार्य प्रभावित
फोटो 21 में।
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। कई विभागों के राजकाज का बोझा ढोने वाले लेखपालों को प्रशासन की रीढ़ कहा जाता है। आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र आवेदकों के सत्यापन से लेकर जमीनों की पैमाइश, विरासत, दाखिल खारिज, कब्जे के विवादों का निपटारा आदि विभागीय काम उनके नियमित दायित्वों में शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लाभार्थियों की पेंशन पात्रता, आवास निर्माण, शौचालय निर्माण, ओडीएफ अभियान की जिम्मेदारियां देकर उन्हें बहुधंधी कर्मचारी बना दिया गया है। यही वजह है कि छह सूत्री मांगों को लेकर लेखपालों की हड़ताल शुरू होने के साथ ही प्रशासनिक कामकाज की रीढ़ चरमराने लगी है और जन सामान्य के लोग परेशान हो रहे, सो अलग।
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आय, जाति, निवास के सात हजार आवेदन लंबित
इन दिनों शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश प्रक्रिया तेजी पर है। इसलिए आय, जाति, निवास आदि प्रमाण पत्रों की मांग बढ़ गई है। सामान्य दिनों में हर माह जिले में औसतन 500-600 आवेदन प्रतिदिन ऑनलाइन होते हैं, लेकिन आजकल रोजाना लगभग एक हजार आवेदन हो रहे हैं। लेखपालों के स्तर से आवेदकों का सत्यापन होने के बाद ही प्रमाण पत्र जारी होते हैं। हड़ताल से लगभग सात हजार नए आवेदन लंबित हो गए हैं।
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गन्ना सर्वे और अवैध कब्जे हटाने का काम प्रभावित
आवंटित सर्किल (क्षेत्र) का नियमित दौरा कर ग्रामीणों की विभाग से संबंधित समस्याओं का निस्तारण, भू अभिलेखों का मौके पर सत्यापन करना लेखपालों का नियमित विभागीय दायित्व है। इसके बावजूद उनसे गांव में कोटा सत्यापन को खुली बैठक कराने, गन्ना सर्वे की जांच, प्रमाण पत्रों के सत्यापन, क्रॉप कटिंग, पेंशन एवं ऋण माफी के पात्र चिन्हीकरण आदि तमाम अन्य कार्य भी लिए जा रहे हैं। नतीजा यह हुआ कि लेखपालों के काम नहीं करने से सरकार की प्राथमिकता सूची वाले यह सारे कार्य ठप हो गए हैं।
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654 स्वीकृत पदों के सापेक्ष कार्यरत सिर्फ 525 लेखपाल
लेखपालों पर कार्य बोझ की अधिकता का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि जिले में इस संवर्ग के कुल 654 पद स्वीकृत है, लेकिन कार्यरत हैं केवल 525। प्रत्येक लेखपाल के पास पहले से कई ग्राम पंचायतों का चार्ज है। रिक्त पदों के सर्किलों का समायोजन भी कार्यरत लेखपालों के बीच किया गया है। इन दिनों ओडीएफ अभियान में लेखपालों को जुटाया गया, लेकिन हड़ताली लेखपाल इस काम से भी इन दिनों दूरी बनाए हैं।
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मांगे स्वीकृत होने तक प्राथमिकता सूची अर्थहीन
फोटो 22 में।
काम करने में लेखपाल संवर्ग का कोई सानी नहीं। हमेशा शासन-प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और इसीलिए महत्वपूर्ण काम इसी संवर्ग को सौंपे जाते हैं, लेकिन धैर्य की भी सीमा होती है। प्राथमिकता सूची वाले कामों की परवाह अधिकारी करें। सूची को लेखपालों की मान्यता तभी मिलेगी जब हमारी मांगें मानी जाएंगी।
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-रामकिशन यादव, जिलाध्यक्ष, लेखपाल संघ
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हड़ताल के साथ सख्ती से निपटने की तैयारी
यह सही है कि लेखपालों से कई तरह के काम लिए जा रहे हैं, लेकिन उनकी हड़ताल से कोई काम प्रभावित नहीं होने दिया जा रहा। प्रमाण पत्रों के लिए ऑनलाइन आवेदन पहले से खुले हैं। उनके कुछ काम विकास विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को सौंपे गए हैं। शासन से लागू एस्मा के तहत काम पर लौटने की चेतावनी दी जा चुकी है। अन्यथा की स्थिति में हड़ताली लेखपालों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
-रामजी मिश्रा, एसडीएम सदर
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