कल कल बहती गोमती नदी की धार गत वर्ष जून में रुक गई थी, इस वर्ष भी गर्मी ज्यादा होने पर धार बंद हो जाने की आशंका है। इसका बड़ा कारण नदी की सफाई न होना और नदी तट तक कब्जा कर की जा रही खेती है।
किवदंती है कि इंद्र ने एक बार गौतम ऋषि का रूप धर कर उनकी पत्नी अहिल्या से छल किया था। कुपित गौतम ऋषि ने इंद्र और अहिल्या को श्राप दे दिया था। ऋषि ने श्राप मुक्ति के लिए इंद्र से गोमती के तटों पर 1001 शिवलिंगों की स्थापना कर तपस्या की, तब कहीं जाकर उनको ऋषि के श्राप से मुक्ति मिल सकी थी। उस समय इंद्र को श्राप से मुक्ति मिल गई लेकिन अब गोमती नदी जलीय जीवों की हत्या, तटों पर की जा रही खेती से इस कदर घायल हैं कि यह नाले के रूप में तब्दील होकर रह गई हैं। गोमती को भी अब किसी ‘भगीरथ’ की दरकार है।
उधर, बंडा में गायत्री परिवार और भाजपा कार्यकर्ताओं ने सोमवार को बैठक कर संकल्प लिया कि बंडा के सुनासिर नाथ तट से माधौटांडा तक जेसीबी से सफाई की जाएगी, जिससे गोमती की धार अविरल हो सके। जेसीबी का खर्च गायत्री परिवार के लोग वहन करेंगे। इस मौके पर श्यामलाल मिश्रा, डॉ. विनोद कुमार शर्मा, सुरेश श्रीवास्तव सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
नमामि गंगे प्रोजेक्ट में शामिल फिर भी दशा बदहाल
गंगा को अविरल बनाने के लिए कैबिनेट की ओर से नमामि गंगे कार्ययोजना को मंजूरी दी गई थी। नवंबर 16 में इस योजना में गंगा की सहायक नदियां भी शामिल की गई थी, इसमें आदि गंगा के नाम से मशहूर गोमती नदी भी शामिल थी, लेकिन अब तक गोमती के विकास के लिए कोई काम नहीं हो सका है।
योजना के तहत क्या होने थे कार्य
पुवायां। नमामि गंगे परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को नवंबर 16 में दिल्ली में केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की पहली बैठक में गंगा की सहायक नदियों को डीपीआर में शामिल करने का राज्यों के अनुरोध को मान लिया गया था। परियोजना में उत्तर प्रदेश से केवल गोमती, गंडक और शारदा को ही शामिल किया गया था। इससे गोमती, गंडक और शारदा का भी गंगा नदी की तरह विकास किया जाना था।
कहां से निकलती है गोमती
पुवायां। गोमती की यात्रा पीलीभीत जनपद के माधौटांडा कसबे के पास (गोमत ताल) फुलहर झील से शुरू होती है। उद्गम स्थल से जनपद शाहजहांपुर, लखीमपुर, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, जौनपुर होते हुए 960 किमी का सफर तय करके वाराणसी में गोमती गंगा मिलन होता हैं। शाहजहांपुर में नदी कुल 103 किमी लंबी है।
क्या है वर्तमान स्थिति
एक समय था जब गोमती नदी के किनारे सैकड़ों एकड़ जमीन पर जंगल की तरह पेड़ खड़े थे। धीरे-धीरे समय बदलता गया और गोमती के किनारों की हरियाली भी गायब होती गई। भूमाफिया ने नदी की जमीन पर कब्जा जमा लिया। इसके अलावा नदी में कूड़ा करकट डालने से प्रदूषण भी तेजी से बढ़ा है। पड़ोस के खेतों में कीटनाशक का प्रयोग होने और इसका पानी नदी में आने से जलीय जंतु मरने के कारण नदी में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।
जन सहयोग से गोमती नदी की सफाई कराई जाएगी। इसके लिए नोडल अधिकारी तय कर दिए गए हैं। एक माह तक लोगों को जागरूक किया जाएगा और एक माह बाद विधिवत सफाई कार्य शुरू होगा।
- अमृत त्रिपाठी, जिलाधिकारी शाहजहांपुर
फोटो-22,गुटैया में प्रधान, किसानों को संबोधित करते डीएम अमृत त्रिपाठी
फोटो-23,गोमती सफाई अभियान को लेकर हुई बैठक में शामिल लोग
एकजुट हो करें गोमती नदी की सफाई में मदद
डीएम ने कहा-एक माह तक बनेगी कार्य योजना, लोग किए जाएंगे जागरूक
अगले महीने से शुरू होगा सफाई अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां।
जन सहयोग से गोमती नदी की धारा को अविरल बनाने के लिए अगले महीने से सफाई शुरू कराई जाएगी। नदी में जमा गाद को हटाकर, झाड़ झंखाड़ भी साफ किया जाएगा।
सोमवार को पुवायां-खुटार मार्ग पर गांव गुटैया में किसान इंटर कॉलेज में गोमती नदी के आसपास के गांवों के प्रधानों, किसानों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए डीएम ने कहा कि जन सहयोग से गोमती की सफाई होगी। इसके लिए सभी लोग एकजुट होकर मदद करें। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता उस्मान अली को नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन्हें निर्देश दिए हैं कि गोमती नदी के पास के गांवों के लोगों को जागरूक करें। नोडल अधिकारी को भी कहा गया है कि एक माह में सर्वे करें और कितने स्थानों पर गाद जमा है, उसको चिह्नित कर अगले माह एक प्वाइंट से काम की शुरुआत कराएं। भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश मिश्रा, विधायक चेतराम, तिलहर के विधायक रोशनलाल वर्मा ने कहा कि सभी लोग इस अभियान में हर संभव मदद करें। संत सिचे बाला जी की टीम के मार्गदर्शन में सफाई कार्य आगे बढ़ेगा। बैठक में डॉ. सुधीर गुप्ता, निर्मल सिंह, पाल सिंह, अशोक सिंह, सतवंत सिंह, रामलुभाया शर्मा, मनोज त्रिवेदी, राजेश शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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