गर्मी के साथ बढ़े मच्छरों ने उड़ाई रातों की नींद
0 सड़कों पर कूड़े के ढेर और बजबजाते नाले मच्छरों को दे रहे बढ़ावा
0 सफाई व्यवस्था पर सालाना 23 करोड़ खर्च होने पर भी हालात बदतर
0 डेंगू, मलेरिया और वायरल जैसी बीमारियों को मिल रहा बढ़ावा
फोटो-21,22
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
तापमान बढ़ने के साथ जैसे-जैसे गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है, गंदगी से बजबजाते नाले-नालियां और कचरे के ढेर मच्छरों को भी बढ़ावा दे रहे हैं। मार्च का अभी दूसरा सप्ताह चल रहा है, लेकिन मच्छरों की भरमार दिन भर के थके-हारे कामकाजी लोगों की रातों की नींद छीनने लगी है। शहर में गंदगी का यह हाल तब है, जब सफाई व्यवस्था पर हर साल करीब 23 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। उधर, पालिका प्रशासन नालों की सफाई और मच्छरों की रोकथाम को फॉगिंग कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है जबकि सफाई के पर्याप्त संसाधनों समेत चार फॉगिंग मशीनें उपलब्ध हैं।
लगभग 3.50 लाख की आबादी वाले शहर की सीमाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। शहर के मूल निवासियों की जनसंख्या बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग पलायन कर शहर मेें अपने मकान बना रहे हैं। इस कारण बरेली मोड़ से आगे कांट रोड पर ददरौल तक, तिलहर की ओर कपसेड़ा तक, पुवायां मार्ग पर चिनौर से आगे पैना बुजुर्ग तक, निगोही मार्ग पर गदियाना से आगे बलेली तक और मोहम्मदी मार्ग पर मुकरमपुर तक शहरी क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। सीमा विस्तार नहीं होने से नगरपालिका परिषद केवल चिनौर से बरेली मोड़ तक और अहमदपुर रेती से लेकर ककरा कलां तक पुराने शहर को नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संभाले है, लेकिन सफाई के मोर्चे पर असहाय बनी है।
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30 प्रमुख नाले शहर मेें मच्छरों को पनपने का दे रहे माहौल
शहर मेें अधूरी पड़ी सीवर लाइन का निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा है। हालांकि, कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सीवर लाइन के अवशेष हिस्से का सर्वे करा दिया है, लेकिन इस पर अभी काम शुरू नहीं हो सका। इस कारण घरों का सारा अपशिष्ट पानी और कचरा शहर के 30 प्रमुख नालों से होकर गर्रा-खन्नौत नदियों मेें समा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के सफाई का संदेश देने वाले नारों से शहर मेें सार्वजनिक स्थलों की दीवारें और पुल-पुलिया की रेलिंग रंगी पड़ी हैं, लेकिन तमाम स्थानों पर न तो सूखा कूड़ा डालने वाले कंटेनर दिख रहे और न ही गीले कूड़े वाले। नतीजे मेेें ऐसे स्थानों पर आसपास के नागरिक घरेलू कचरा नालों में उड़ेेल रहे हैं। यही वजह है कि हर साल इन सभी नालों की सफाई पर 1.50 करोड़ व्यय होने के बावजूद उनमें गंदगी जस की तस कायम रहती है।
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नगर पालिका परिषद के यांत्रिक सफाई संसाधन: एक नजर
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संसाधन संख्या
ट्रैक्टर 16
टाटा मैजिक फोर व्हीलर 02
कंटेनर बड़े 227
कंटेनर छोटे 175
जेसीबी 03
कंटेनर मशीन 01
डिपर 01
हाइड्रोलिक 01
ट्रैक्टर नाला सफाई मशीन 01
स्काई लिफ्ट 03
हाथ ठेली 95
हाथ रिक्शा 120
एमएस शीट के कूड़ादान 70
कवर्ड रिक्शे 75
रोबोट 01
मोबाइल टॉयलेट 02
छोटे ट्रैक्टर-ट्राली 04
सेक्शन मशीन 01
फॉगिंग मशीन 04
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सफाई के मानव संसाधन और व्यय: एक नजर
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182 संविदा सफाई कर्मचारी 28.87 लाख रुपये प्रति माह वेतन
351 नियमित सफाई कर्मचारी 150.41 लाख रुपये प्रति माह वेतन
30 नालों की ठेका सफाई 150.00 लाख रुपये प्रति वर्ष
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1.29 करोड़ रुपये से खरीदे जाएंगे स्वच्छता के उपकरण
शहरी क्षेत्र मेें सफाई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए उपकरणों की खरीद हर साल होती है, लेकिन तेजी से बढ़ती आबादी के कारण सफाई के संसाधन जरूरत पडने पर हमेशा अपर्याप्त साबित होते हैं। इसे देखते प्रदेश के नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सफाई के अतिरिक्त संसाधनों की खरीद के लिए नगर विकास विभाग से 1.29 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। गत वर्ष 22 अक्तूबर को कैबिनट मंत्री के स्तर से इस आशय की घोषणा के बाद कई उपकरण खरीदे जा चुके हैं, लेकिन उनकी उपयोगिता तभी साबित होगी, जब शहरी बाशिंदों को गंदगी और मच्छरों से निजात मिले।
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गर्मी के असर से मच्छर तेजी से बढ़ रहे हैं। आमतौर पर फॉगिंग का काम अप्रैल के पहले सप्ताह से शुरू होता है, लेकिन मच्छरों के प्रकोप को थामने के लिए इस बार मार्च के दूसरे सप्ताह से फॉगिंग शुरू कराने का निर्णय किया गया है। इसके लिए मच्छररोधी रसायन जुटा लिए गए हैं। बाड़ूजई पेशावरी और तारीन जलालनगर के बड़े नालों की सफाई नगरपालिका के कर्मचारियों के माध्यम से शुरू करा दी गई है। एक अप्रैल से अन्य सभी नालों की सालाना तलीझाड़ सफाई का काम भी ठेके पर शुरू हो जाएगा। -जहांआरा बेगम, अध्यक्ष, नगरपालिका परिषद