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भाकियू के धरना प्रदर्शन के दौरान जमकर हंगामा

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पुवायां (शाहजहांपुर)। भाकियू के ज्ञापन के बाद भी कार्रवाई नहीं होने के पर मंगलवार को धरना प्रदर्शन के बीच एसडीएम और भाकियू कार्यकर्ताओं के बीच जमकर तकरार हुई। इसके बाद किसानों ने बंडा कूंच का ऐलान कर दिया। इससे पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। बमुश्किल मामले को शांत कराया जा सका।
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बंडा के गांव हसनापुर के किसान तेजा सिंह और उनके पुत्र करनैल सिंह की जमीन का कर्ज माफ होने के बाद भी जमीन की नीलामी किए जाने और हाईकोर्ट में वाद विचाराधीन होने, शाहजहांपुर के सिविल कोर्ट से स्टे होने के बाद भी एसडीएम अजय कुमार तिवारी ने 18 जून को छह एकड़ जमीन पर खड़ी फसल जुतवा कर दूसरे पक्ष को कब्जा करा दिया था। इस दौरान तेजा सिंह की पत्नी ने जहर खाकर जान देने का प्रयास किया था। डॉक्टरों ने इलाज कर उन्हें बचा लिया था। भाकियू ने 20 जून को तहसील दिवस में ज्ञापन देकर तेजा सिंह को जमीन वापस दिलाने की मांग की थी। कार्रवाई नहीं होने पर 27 जून से एसडीएम कार्यालय पर आंदोलन की चेतावनी दी थी।
मंगलवार को जिलाध्यक्ष अजीत सिंह के नेतृत्व में लगभग तीन सौ किसान एसडीएम कार्यालय पहुंचकर धरने पर बैठ गए। दोपहर दो बजे एसडीएम अजय कुमार तिवारी ने किसानों से वार्ता की तो दोनों ओर से बात बढ़ने पर जमकर तकरार हुई। इसके बाद किसानों ने वार्ता का बहिष्कार कर दिया और खुद ही गांव सिनापुर जाकर तेजा सिंह को जमीन पर कब्जा करा देने का ऐलान कर दिया। किसान बंडा रवाना हुए तो सीओ सुमित शुक्ला और कोतवाली प्रभारी अशोक पाल ने बमुश्किल किसानों को समझाकर रोका और मामले की जानकारी अधिकारियों को दी। किसानों के उग्र होने की जानकारी से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर कई थानों की फोर्स के अलावा शाहजहांपुर से क्यूआरटी, पीएएसी, महिला पुलिस, दमकल के वाहन को बुला लिया गया। इससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई।
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किसान नेताओं ने भी मामले की जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत को दी, तो उन्होंने मंडलायुक्त से वार्ता की। कमिश्नर ने डीएम, एसपी से मामले की जानकारी ली। इसके बाद एडीएम सर्वेश कुमार, एएसपी सुभाषचंद्र शाक्य मौके पर पहुंचे। किसानों ने एसडीएम के वार्ता में शामिल होने पर वार्ता का बहिष्कार करने की चेतावनी दी तो सीओ कार्यालय में किसान नेताओं और अधिकारियों के बीच वार्ता हुई। देर शाम धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। एडीएम ने बताया कि मंडलायुक्त एक टीम का गठन करेंगे जो 15 दिन में जांच कर रिपोर्ट देगी। इसमें जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। इस बीच जमीन पर यथास्थित रहेगी।
मामला था यह
बंडा के गांव हसनापुर के किसान तेजा सिंह और उसके पुत्र करनैल सिंह ने वर्ष 2002 में बैंक से 3.16 लाख का कर्ज लिया था। जिसकी दो किस्त अदा करने के बाद शेष 1.70 लाख रुपये का कर्ज अदा नहीं हो सका तो बैंक के पत्र पर तहसील की ओर से दोनों किसानों को आरसी जारी कर दी गई। इसके बाद भी कर्ज की राशि जमा नहीं होने पर चार वर्ष पूर्व गाटा संख्या 384, 385 की छह एकड़ जमीन को राजस्व विभाग ने खुटार के गांव लौहंगापुर के मूल निवासी और वर्तमान में आस्ट्रेलिया में रह रहे निवासी अजीतपाल के नाम 9.96 लाख रुपये में नीलाम कर दिया।
पीड़ित किसान का आरोप है कि कांग्रेस सरकार बनने पर उनका कर्ज भी माफ कर दिया गया था। बैंक ने उन्हें नोड्यूज भी दिया गया था। इसके बाद भी नीलामी की गई। नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर उक्त जमीन का मुख्त्यारनामा कस्बा बंडा निवासी मनप्रीत सिंह के नाम करा दिया गया। नीलामी के बाद दोनों किसानों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार की। जिसका वाद कोर्ट में लंबित है। इधर, मनप्रीत सिंह ने जमीन पर कब्जा लेने का प्रयास किया, तो तेजा सिंह और करनैल सिंह ने सिविल कोर्ट शाहजहांपुर से 25 जुलाई 2017 तक उक्त जमीन के लिए यथास्थित का आदेश प्राप्त कर लिया। इसके बावजूद 18 जून को एसडीएम अजय कुमार तिवारी ने दोनों किसानों की छह एकड़ जमीन पर खड़ी मक्का और धान की फसल को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बलपूवर्क जुतवाकर दूसरे पक्ष को कब्जा दिला दिया था।
इन सवालों का नहीं मिला जवाब
किसान की जमीन पर खड़ी फसल जुतवाकर दूसरे पक्ष को कब्जा दिलाने के मामले में कई अधिकारियों की गर्दन फंसने के आसार हैं। एडीएम से वार्ता में किसान नेताओं ने सवाल उठाया कि जमीन की नीलामी चार वर्ष पूर्व हुई थी। न्यायालय में वाद विचाराधीन होने के कारण 10 वर्ष तक किसी अधिकारी ने कार्रवाई नहीं तो वर्तमान एसडीएम कब्जा दिलाने क्यों पहुंच गए। खेत में खड़ी मक्का की फसल कुछ ही दिन में कटने वाली थी, कार्रवाई के लिए मात्र 15 दिन का इंतजार क्यों नहीं किया गया और किसान की फसल जुतवा दी गई। तहसील भर में जमीनों पर कब्जे के तमाम मामले हैं तो प्रशासन तेजा सिंह के मामले की तरह सभी में कार्रवाई क्यों नहीं करता है। यदि किसान पर 1.71 लाख रुपये ही कर्ज बाकी रह गया था तो ट्रैक्टर आदि की नीलामी कर कर्ज वसूल किया जाना था, जमीन गुपचुप ढंग से, कम रुपयों में क्यों नीलाम कर दी गई। नीलामी की सूचना किसान को क्यों नहीं दी गई। जब कर्ज माफी में तेजा सिंह का भी कर्ज माफ हुआ था तो नीलामी क्यों की गई। किसान नेताओं के सवाल पर अधिकारी निरुत्तर नजर आए।
एसडीएम के खिलाफ जमकर नारेबाजी, निलंबन की मांग
भाकियू नेता सबसे ज्यादा एसडीएम अजय कुमार तिवारी से खफा दिखे। एसडीएम के खिलाफ दो घंटे तक जमकर नारेबाजी की गई। अधिकारियों के आने पर किसान नेताओं ने एसडीएम के निलंबन की मांग उठाई। इस दौरान एसडीएम अपनी कार्रवाई को सही ठहराते रहे। किसानों ने कहा कि आज के मामले का समाधान होने के बाद भी किसान विरोधी एसडीएम को नहीं हटाने तक उनका विरोध जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान भाकियू के बरेली मुरादाबाद मंडल प्रभारी बिजेंद्र सिंह यादव, पीलीभीत के जिलाध्यक्ष सतेंद्र सिंह, अनिल सिंह यादव, संजीव अवस्थी, श्रीकृष्ण जाटव, मनोज यादव, रंजीत सिंह सहित बरेली, बदायूं के तमाम किसान नेता मौजूद रहे।
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कई बार बिगड़ा मामला
धरना प्रदर्शन के दौरान एसडीएम से वार्ता विफल होने और जिला मुख्यालय से एडीएम के पहुंचने तक किसान कई बार बंडा जाकर जमीन पर किसान को खुद ही कब्जा दिलाने के लिए र्कई बार चलने को तैयार हुए, इससे स्थिति काफी तनावपूर्ण होती रही, लेकिन सीओ सुमित शुक्ला और कोतवाली प्रभारी अशोक पाल ने हर बार किसानों को शांत कर मामले को बिगड़ने से बचाया। पीएएसी के आने के बाद धरने में शामिल पुरुष और महिलाएं भी डंडे लेकर खड़े हो गए। इससे लगा कि स्थिति बिगड़ सकती है, लेकिन किसान नेताओं ने किसानों को समझाकर शांत किया।
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