जिला पंचायत के नवगठित बोर्ड की बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में हुई मैराथन बैठक में वित्त वर्ष 2016-17 के लिए 30.49 करोड़ रुपये का आय-व्यय बजट ध्वनिमत से पारित हो गया। इसी मौके पर नए वित्त वर्ष में जिला योजना के विभिन्न कामों के लिए 7.37 अरब रुपये की कार्य योजना प्रस्तावित की गई। कहने को नवगठित बोर्ड की पहली बैठक जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों के शपथ लेने वाले दिन हुई, लेकिन उस दिन खुशी के अतिरेक में माहौल शोर-शराबे वाला होने से बैठक रस्मी साबित हुई। इसके उलट बृहस्पतिवार को हुई जिला पंचायत की दूसरी बैठक कई मायनों में सार्थक रही। न सिर्फ चालू वित्त वर्ष में आय-व्यय के पुनरीक्षित बजट, नए वित्त वर्ष के अनुमानित बजट और जिला योजना की कार्य योजना को अंतिम रूप मिला, सदस्यों ने विभिन्न विभागों की समस्याओं से करीब तीन घंटे तक सदन को गरमाए रखा। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष अजय प्रताप सिंह यादव ने सदस्यों और जन प्रतिनिधियों से विभाग वार समस्याएं आमंत्रित कीं तो शिकायतों की झड़ी लग गई। शुरुआत बेसिक शिक्षा और बिजली विभाग से हुई तो सदस्यों ने बीएसए राकेश कुमार और एक्सईएन अशोक सुंदरम को करीब पौन घंटे तक सवालों के कटघरे में खड़ा रखा। एक्सईएन ने कई शिकायतों को अपने कार्य क्षेत्र से बाहर बताया तो भाजपा विधानमंडल दल के नेता सुरेश कुमार खन्ना, विधायक राजेश यादव, रोशन लाल वर्मा आदि की त्यौरियां चढ़ गईं। जनप्रतिनिधियों ने संबंधित एक्सईएन और अधीक्षण अभियंता के बारे में सवाल किया तो पता चला कि बैठक में नहीं आए। हालांकि, कुछ देर बाद पॉवर कारपोरेशन के एसई बैठक में पहुंच गए और उठाई गई समस्याओं पर विभाग का पक्ष रखने के साथ विद्युतीकरण से जुड़ीं कई मांगों का निस्तारण कराने का भरोसा दिया, लेकिन अफसरों की गैरहाजिरी और लेटलतीफी सदन को रास नहीं आई। जिला पंचायत अध्यक्ष ने अधिकारियों को बताई गई समस्याओं का निस्तारण जल्द कराने के निर्देश दिए। साथ ही गैरहाजिर अफसरों का जवाब तलब करने का निर्देश देते हुए कहा कि अगली बैठक में विभागाध्यक्ष अपने प्रतिनिधि भेजने के बजाय स्वयं उपस्थित होकर सदन के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करें। इस मौके पर कृषि, जल निगम, आपूर्ति, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, सिंचाई आदि विभागों से जुड़ी समस्याएं सदस्यों के निशाने पर रहीं।