जिले में बुखार का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। दर्जनों गांवों में फैले बुखार से 32 दिनों में 28 मौतें हो चुकी हैं। इनमें 24 बच्चे शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने शुरुआती दौर में चार बच्चों की मौत डिप्थीरिया से होने की बात कही थी लेकिन जब टीकाकरण पर सवाल उठने लगे तो साधारण बुखार बताया जाने लगा। यह स्थिति तब है जब जिले के प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी स्वयं मनोरथपुर गांव गए थे। इसके बाद पूर्व कें द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद समेत जिले के अफसरों ने मनोरथपुर गांव का जायजा लिया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कई दिन लगातार गांव में कैंप भी किया लेकिन फिर भी मौतों का सिलसिला नहीं थमा।
जिला अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो ओपीडी में इन दिनों करीब 1700 मरीजों के पर्चे बन रहें हैं, इनमें ज्यादातर मरीज बुखार से पीड़ित आ रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी का भी है। यहां भी प्रतिदिन 40 से 50 मरीज बुखार से पीड़ित आ रहे हैं। गोरखपुर और फर्रुखाबाद में बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग पर शासन का शिकंजा कसने के बाद भी यहां इलाज के नाम पर सिर्फ रस्मअदायगी की जा रही है। जलालाबाद के मनोरथपुर सहसोबारी गांव में बुखार से 12 बच्चों की मौत के बाद भी महकमा नहीं चेत रहा है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और नाकामी का इससे बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि आज तक यह नहीं तय हो पाया कि आखिर बच्चों की मौत किस बीमारी से हो रही है। नतीजा यह है कि लोग अपने बीमार बच्चों का इलाज कराते रहे और मौतें होती रहीं।