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25 दिन का होगा ग्रीष्म अवकाश, 15 दिन होंगी सर्दियों की छुट्टी

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शाहजहांपुर। बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित परिषदीय एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों में एक बार फिर बड़ा बदलाव किया गया है। इस बदलाव के पीछे मिशन प्रेरणा की लक्ष्यपूर्ति करना बताया गया है। मगर ग्रीष्म अवकाश में हुई कटौती शिक्षकों के गले नहीं उतर रही है। शासनादेश जारी होते ही शिक्षक संगठनों में विरोध के स्वर सुनाई देने लगे हैं।
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नई व्यवस्था के अंतर्गत अब बेसिक और परिषद से संचालित अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों में कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जिनमें सबसे खास बदलाव ग्रीष्म अवकाश की कटौती है। इसके मुताबिक बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में 20 मई से 15 जून तक ही ग्रीष्म अवकाश होगा, 16 जून से सत्र आरंभ किया जाएगा। इधर के जिन 15 दिनों की कटौती की गई है, वे 15 दिन 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक शीत अवकाश के लिए निर्धारित किए गए हैं। अर्थात अब 15 दिन के शीत अवकाश भी शुरू कर दिए गए हैं। इसके अलावा वार्षिक पंचांग घोषित करते हुए 240 दिन न्यूनतम शिक्षण दिवस भी निर्धारित हुए है। स्कूलों में शिक्षक डायरी अनिवार्य कर दी गई है, साथ ही सभी स्कूलों में पुस्तकालय और खेलकूद की व्यवस्था को भी बल दिया गया है।
बदलाव की कड़ी में एक बड़ी बात यह है कि विद्यालय अवधि में किसी प्रकार रैली, प्रभात फेरी, मानव श्रृंखला, नवाचार गोष्ठी भी नहीं हो सकेगी। यहां तक कि किसी भी शिक्षक संगठन को स्कूल समय में कोई भी गतिविधि संचालित नहीं करने की मनाही की गई है। इन गतिविधियों में कोई शिक्षक स्कूल समय में प्रतिभाग नहीं करेगा, यदि अपरिहार्य हो तो पहले से अनुमति लेना जरूरी होगा। एक अप्रैल से 30 सितंबर तक विद्यालयों का समय सुबह आठ से दो बजे तक और पहली अक्तूबर से 31 मार्च तक सुबह नौ से तीन बजे तक स्कूल खोले जाएंगे। इसके अलावा सुबह प्रार्थना के बाद 15 मिनट योगाभ्यास भी छात्रों को कराया जाएगा। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने 14 अगस्त को आदेश जारी कर दिया है। इस संबंध में बीएसए राकेश कुमार ने बताया कि आदेश तत्काल रूप से लागू हो गया है।
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शासन की मनमानी स्वीकार नहीं: संजय
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री एवं जिलाध्यक्ष संजय सिंह का इन बदलावों पर कहना है कि शासन की मनमानी किसी भी दशा में स्वीकार नहीं की जाएगी। शिक्षकों पर अव्यवहारिक कोई भी नियम-कानून थोपा नहीं जाना चाहिए। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासनादेश में कई बिंदुओं पर उचित निर्णय नहीं लिया गया है। आरटीई एक्ट में जो न्यूनतम दिवस रखे गए हैं, उन्हें बढ़ाकर 240 दिन करना उचित नहीं है। मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठनों को अपनी बात रखने का हक है, उसे कोई सरकार नहीं रोक सकती। इसका विरोध जरूर किया जाएगा।
नए बदलाव से सहमत नहीं: पाली
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष जागेश कुमार पाली का कहना है कि वह नए बदलाव से सहमत नहीं हैं। यह बदलाव तानाशाही रवैया वाला है, इससे किसी का भला नहीं होने वाला। भीषण गर्मी में स्कूल खोलना बच्चों के लिए उचित नहीं कहा जा सकता। इससे सुधार की संभावना कम और परेशानी अधिक होगी। मात्र 30 मिनट में मध्यान्ह भोजन कराने की बात हास्यास्पद है। आधा घंटे में एक साथ सौ-दो सौ बच्चों के हाथ नहीं धुलाए जा सकते, भोजन कराना तो दूर की बात। वह प्रदेश नेतृत्व के निर्णय का इंतजार करेंगे।
मनमानी पर उतारू है सरकार: संदीप
जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के एक अन्य गुट के महामंत्री संदीप कुमार मिश्रा का कहना है कि स्कूलों का वर्किंग-डे बढ़ाकर आरटीई एक्ट निर्धारित हैं तो अब 240 दिन कैसे हो सकते हैं। यह सरकार की मनमानी है। इसी तरह 16 जून को स्कूल खोलना भी अदूरदर्शिता को दर्शाता है। इस बारे में वह प्रांतीय नेतृत्व के आदेश का पालन कर विरोध की रणनीति बनाएंगे।
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