शाहजहांपुर। रोजगार मेलों में रोजगार पाने के मामले में महिलाएं, पुरुषों से काफी पीछे हैं। रोजगार मेलों के माध्यम से इस वित्तीय वर्ष में अब तक मात्र 154 महिलाओं को नौकरी मिली है। वहीं 2494 पुरुषों ने नौकरी पाई है। सामने आया है कि जागरूकता के अभाव के साथ ही गृह जनपद से बाहर और कम वेतन की नौकरी होने के कारण युवतियां कम रुचि लेती हैं।
सेवायोजन कार्यालय में कुल 52643 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। इनमें 38912 पुरुष और 13731 महिलाएं हैं। सेवायोजन विभाग को इस वित्तीय वर्ष में 39 रोजगार मेले लगाने का लक्ष्य दिया गया है। इसमें अब तक 20 मेले लगाए जा चुके हैं। एक महिला रोजगार मेला भी लगाया गया है। इसको आर्य महिला डिग्री कॉलेज में आयोजित किया गया था। यह महिलाओं के लिए कैंपस मेला था। अब तक लगाए गए कुल मेलों में 2648 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। 2494 पुरुषों तो 154 महिलाओं को नौकरी मिली है। मेलों में 328 महिलाओं के ही भाग लेने की बात सामने आई है। सामने आया है कि रोजगार मेलोंं में न्यूनतम वेतनमान 10200 और अधिकतम 26800 रुपये रहा।
काउंसलिंग के माध्यम से महिलाओं को किया जाता है जागरूक
अधिकारियों के मुताबिक महिलाओं को नौकरी के लिए जागरूक करने के लिए काउंसलिंग सत्र का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही महिला कॉलेजों में भी रोजगार मेले का आयोजन कर उनको नौकरी के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सेवायोजन विभाग पूरी तरह से ऑनलाइन हो गया है। अभ्यर्थी को पंजीकरण ऑनलाइन करना होता है। इसके बाद उसे लॉगइन आईडी मिल जाती है। इसके माध्यम से वह रोजगार संबंधित सभी जानकारी ऑनलाइन देख सकता है। कहां रोजगार मेले का आयोजन हो रहा है, इसकी जानकारी भी पोर्टल पर रहती है।
प्रतिभागियों से बात
रोजगार मेले में बाहर की कंपनियां साक्षात्कार के लिए आती हैं। नौकरी भी दूर-दूर शहर में लगती है। इसमें वेतन बहुत कम होता है। कम वेतन में बड़े शहरों में गुजारा नहीं हो सकता है।
- पलक
रोजगार मेले में नौकरी कांट्रैक्ट पर मिलती है। नौकरी मिल भी जाए तो कंपनी अपनी शर्त के आधार पर कभी भी नौकरी से बाहर कर सकती है। इसलिए युवा इन पर विश्वास नहीं करते हैं।
- इशिका
रोजगार मेले में महिलाओं की अपेक्षा पुरुष अधिक संख्या में प्रतिभाग करते हैं। अधिकतर महिला स्थानीय स्तर पर ही नौकरी करना चाहती हैं। इसकी वजह से इनकी संख्या कम रहती है। महिलाओं को जागरूक किया जाता है कि वे सेवायोजना कार्यालय में पंजीकरण कराएं।
- विजय सुधाकर सिंह, जिला सेवायोजन अधिकारी
पलक