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शहर में 55 इमारतें जर्जर, 20 कभी भी ढहने की स्थिति में

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कभी भी ढह सकती हैं शहर की 20 इमारतें
55 जर्जर इमारतों के स्वामियों को भवन खाली करने का नोटिस
जर्जर, आंशिक जर्जर भवनों में कई दुकानें और होटल भी
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। शहर में जर्जर भवनों को लेकर लंबे समय के बाद प्रशासन ने गंभीरता से काम किया है। नगर निगम क्षेत्र में कराए गए सर्वे में चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। शहर में 55 से ज्यादा भवन जर्जर और आंशिक जर्जर। बारिश के मौसम में यह जर्जर भवन काल बन सकते हैं। सर्वे के आधार पर भवन स्वामियों को नोटिस जारी कर भवन खाली करने के लिए कहा गया है। यह भी कहा गया है कि अगर उनको किसी सहयोग की जरूरत है तो वह नगर निगम करेगा। इसके बाद भी अगर भवन खाली नहीं किया जाता और कोई हादसा होता है तो भवन स्वामी स्वयं उत्तरदायी होंगे।
बारिश के मौसम में भवनों के ढहने के मामले बढ़ जाते हैं। अक्सर ऐसे जर्जर भवन हैं जिनके ढहने से जान-माल का नुकसान हो सकता है। बारिश का मौसम शुरू होने से पहले डीएम अमृत त्रिपाठी ने सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार और नगर निगम को शहर में जर्जर भवनों को चिंह्ति करने के निर्देश दिए थे। करीब एक महीने की कार्रवाई के बाद शहर में कुल 55 भवन-दुकानें चिंह्ति किए गए हैं। इनमें 20 की हालत बेहद जर्जर है, जबकि 35 को आंशिक जर्जर माना गया है। जर्जर भवनों के स्वामियों को नगर निगम की ओर से नोटिस जारी किया गया है। इन्हें निर्देश दिए गए हैं कि एक सप्ताह के भीतर भवन खाली कर दें। इसके साथ ही नगर निगम जर्जर भवनों के निस्तारण को लेकर भी प्लान तैयार कर रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि जिन जर्जर भवनों को चिंह्ति किया गया है उनमें कई दुकानें और छोटे होटल भी हैं।
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सरकारी भवनों का नहीं हुआ सर्वे
भवनों के सर्वे के बाद जर्जर और आंशिक जर्जर भवनों-दुकानों को जो सूची सामने आई है उसमें एक भी सरकारी भवन का नाम नहीं है। जबकि शहर में कई सरकारी भवन बेहद जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। मोहल्ला गदियाना स्थित श्रम कार्यालय का भवन गिराऊ हातल मे है। छत से प्लास्टर छूट कर अक्सर गिरता रहता है। खिरनी बाग स्थित राजकीय छात्रावास के भवन का काफी हिस्सा भी जर्जर है। कई सरकारी कॉलोनियों में भी भवनों की हालत बेहद खराब है। सर्वे में इनकी ओर किसी का ध्यान नहीं गया।
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रेल कॉलोनी में कई भवन जर्जर, पार्सल भवन टपक रहा
रेल कॉलोनी की दशा भी काफी खराब है। लंबे समय से यहां मरम्मत का काम न होने की वजह से तमाम आवास जर्जर हो गए हैं। बारिश के मौसम में इनकी छतें टपकती हैं। इतना ही नहीं अंग्रेजों के जमाने में बना हुआ रेलवे का पार्सल भवन भी टपक रहा है। इसकी छत के पानी का सही निकास न होने की वजह से यह स्थिति बनी है।
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जर्जर 20 भवनों के स्वामियों को नोटिस जारी कर भवन खाली करने को कहा गया है। इसके बाद भी वह भवन खाली नहीं करते हैं और कोई हादसा होता है तो वह खुद जिम्मेदार होंगे। घनी आबादी वाले इलाकों में जर्जर भवनों के निस्तारण पर विचार किया जा रहा है।
- अमृत त्रिपाठी, डीएम/ प्रशासक नगर निगम
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