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लगातार बारिश से टापू में बदले दोआब क्षेत्र के गांव, ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें

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बारिश से टापू में बदले दोआब क्षेत्र के गांव
बहगुल का पैंटून पुल टूटने से डेढ़ दर्जन गांवों का मुख्यालय से टूटा संपर्क
ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ी
फोटो 21 में।
अमर उजाला ब्यूरो
जलालाबाद। लगातार हो रही वर्षा से जिले की नदियों में अभी तक भले ही बाढ़ की स्थिति नहीं बनी हो, तहसील क्षेत्र में बहगुल तथा रामगंगा के बीच दोआब क्षेत्र में बसे करीब डेढ़ दर्जन गांव टापू में बदल गए हैं। इससे हजारों ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बहगुल नदी पर बना पैंटून पुल टूटने के बाद नाव की व्यवस्था न होने से इन गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट गया है। साथ ही बच्चों की पढ़ाई व्यवस्था भी चौपट हो गई है क्योंकि उनका स्कूलों तक पहुंचना कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रात के समय किसी गांव में कोई गंभीर बीमारी की चपेट मेें आ जाए तो भगवान के भरोसे रहने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है।
नगर से करीब 12 किमी दूर तिकोला गांव के आगे बहगुल नदी है और उसके बाद रामगंगा नदी है। रामगंगा के आगे कलान तहसील के विकास खंड मिर्जापुर का क्षेत्र लग जाता है। इन्हीं दोनों नदियों के बीच डेढ़ दर्जन से ज्यादा गांव बसे हुए हैं। इन गांवों के लोगों के आने-जाने के लिए हर साल जिला पंचायत की ओर से बहगुल नदी पर अस्थाई पुल का निर्माण कराया जाता है। बरसात में नदी में पानी बढने पर पैन्टून पुल तोड़ दिया जाता है। इस वर्ष यह अस्थाई पुल करीब बीस दिन पहले ही तोड़ दिया गया।
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बीते सप्ताह तक नदी में पानी काफी कम होने से लोग जैसे-तैसे उसे पार कर अपना काम चला रहे थे। इधर, तीन-चार दिन से बहगुल नदी पूरे उफान पर आ गई है और पानी विस्तार लेने से नदी की चौड़ाई बहुत ज्यादा हो गई है। इस कारण हजारों ग्रामीणों के आवागमन का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। खास बात यह है कि ग्रामीणों के आवागमन के लिए प्रशासन द्वारा इस बार नाव आदि की व्यवस्था नही की गई है। जरूरी काम होने पर ग्रामीण काफी दूर एक अन्य गांव के समीप चलाई जा रही प्राइवेट बोट से नदी पार कर तहसील पहुंच पाते हैं, लेकिन रात के समय यह व्यवस्था भी ठप हो जाती है।
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दोआब क्षेत्र के स्कूल बने दिखावटी, पहुंच नहीं रहे शिक्षक
दोनों नदियों के बीच बसे लगभग सभी गांवों में सरकारी स्कूल हैं। पैन्टून पुल टूटने के बाद यह स्कूल भी दिखावटी बन गए हैं। दरअसल, इन स्कूलों में बाहर के शिक्षक नियुक्त हैं, लेेकिन वहां तक आवागमन का साधन छिन जाने से शिक्षक वहां तक पहुंच नहीं पा रहे। इस कारण अधिकांश स्कूलों में अघोषित अवकाश चल रहा है। यही हाल जलालाबाद आकर हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने वाले बच्चों का है, क्योंकि वह भी कॉलेज नहीं पहुंच पा रहे।
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आंखें चुरा रहे पुल का वादा करने वाले नेता
काला पानी जैसी सजा काट रहे दोआब क्षेत्र के ग्रामीण बहगुल नदी पर पुल बनवाए जाने की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। हर साल चुनाव के दौरान विभिन्न दलों के नेता इन ग्रामीणों की भावनाओं का दोहन कर पुल बनवाने का आश्वासन देते भी नहीं थकते, लेकिन चुनाव जीतने के बाद इस तरफ से सभी आंखें फेर लेते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनवाने का वादा करने वाले नाव की व्यवस्था तक कराने की जरूरत नही समझ रहे।
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पैन्टून पुल टूटने से यह सभी गांव हो रहे प्रभावित
रामगंगा और बहगुल नदी के बीच उइला, संगाहे, थाथरमई, कुंडरा, पहाड़पुर, चितरउ, नगला किशन, रामपुर, ढका डांडी, मिल्किया जुर्रा, कील्हापुर खुर्द, पंखिया नगला, गोंडा आदि गांवों में हजारों परिवारों की बसावट है। पैन्टून पुल टूटने से इन सभी गांवों के लोग तहसील मुख्यालय तक आने को तरस रहे हैं।
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ग्रामीणों के आंदोलन भी साबित हो चुके हैं बेअसर
बहगुल नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर क्षेत्र के ग्रामीण पहले भी कई बार आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें कोरे आश्वासन देकर चुप करा दिया जाता है। बीते साल करीब पंद्रह दिन चले अनशन के बाद यहां आईं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कृष्णाराज ने तिकोला गांव में आंदोलनकारियों को बुलवाकर पुल का निर्माण जल्द करा देने का आश्वासन देकर उनका आंदोलन समाप्त करवा दिया था। तब से उन्होंने पलटकर इलाके को देखने की जरूरत नहीं समझी। सपा शासनकाल में भी ग्रामीणों ने कई दिन आंदोलन चलाया। उस दौरान तत्कालीन पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री राममूर्ती सिंह वर्मा ने पुल निर्माण कराने का वादा किया था, लेकिन समय की कसौटी पर यह आश्वासन भी कोरा साबित हुआ।
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