फोटो-37,मिर्जापुर के ग्राम कुनिया शहनजीरपुर में कटान करती रामगंगा
फोटो-38,मिर्जापुर के ग्राम हरिहरपुर में कटान कर रही रामगंगा
फोटो-39, परौर में राम गंगा के कटान से बचने के लिए बंबू क्रीट बनाते ग्रामीण।
फोटो-40,रामगंगा के किनारे कटान के स्थान पर रेत व कंकड़ की बोरियां डालते ग्रामीण।
परौर के पास रामगंगा की बाढ़ में विलीन हुई सात जिओ ट्यूब ठोकरें
नदियों में उफान, कटरी में तेज हुआ भूमि कटान
बाढ़ प्रभावितों को नहीं मिल रहीं जरूरी दवाएं और खाद्य रसद
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। नरौरा समेत उत्तराखंड और पश्चिमी उप्र के बैराजों से लगातार भारी मात्रा में पानी रिलीज किए जाने से जिले से होकर बहने वाली गंगा और रामगंगा में उफान के साथ तटवर्ती गांवों में भूमि कटान बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। बीते 24 घंटे के मुकाबले कलान क्षेत्र के भैंसार बांध पर गंगा पांच सेमी बढ़ गई। इस बीच, नरौरा से रिलीज पानी की मात्रा बढ़कर 1.71 लाख क्यूसेक हो जाने से अगले 48 घंटे तक गंगा का जल स्तर बढ़ने का अनुमान है। रामगंगा के जल स्तर में मामूली कमी आई, लेकिन इसी के साथ तटवर्ती कृषि भूमि का कटान तेज हो गया है। इस बीच, बाढ़ से घिरे परौर, मिर्जापुर क्षेत्र के ग्रामीणों को अभी तक राहत के तौर पर खाद्य रसद और अन्य जरूरी सामान नहीं मिल पा रहा है।
सिंचाई विभाग के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि बदायूं के कछला घाट पर गंगा 15 सेमी बढ़कर 163.65 मीटर पर पहुंच गई है। इसलिए अगले 24 घंटे में भैंसार बांध का जल स्तर बढ़ने के पूरे आसार हैं। अन्य बैराजों से डिस्चार्ज 8413 क्यूसेक पानी रामगंगा को और उफनाएगा। बाढ़ नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि शहर के समीप गर्रा का जल स्तर पांच सेमी बढ़ा है, लेकिन ड्यूनी डाम से पानी की निकासी रुक जाने से अगले 24 घंटे में गर्रा का जल स्तर घटने से तटवर्ती इलाकों में कटान की समस्या पैदा हो सकती है।
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गंगा ने बिचपुरी समेत कई गांवों को बनाया निशाना
परौर में रामगंगा की जियो ट्यूब से बनाई गईं नौ में से सात ठोंकरे रामगंगा में बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी हैं। अब बंबू क्रेट व बालू की बोरियों के सहारे कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन सरकार के 27 लाख रुपये पानी में बह गए। अब गंगा ने बिचपुरी व मोहनपुर समेत परौर को निशाना बनाया है। परौर केे राम ताल से गंगा की दूरी मात्र 25 मीटर रह गई है। कटान रोकने के प्रयास तेज नहीं किए गए तो परौर के बीच से रामगंगा बहेगी। प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूल भवन भी रामगंगा के निशाने पर आ गए हैं।
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निष्क्रिय पड़ीं बाढ़ चौकियां, कर्मचारी नदारद
बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं को ध्यान में रखकर प्रभावित स्थानों पर 71 बाढ़ चौकियों की स्थापना की गई है। इन चौकियों पर एएनएम, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर एवं सहायिका, हल्का लेखपाल, पंचायत सेके्रटरी, हल्का दरोगा व बीट के सिपाही की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन वहां जनता की समस्या सुनने के लिए कोई नहीं मिलता। अधिकारियों के आने की सूचना पर ही एक-दो घंटे को चौकियों पर सक्रियता रहती है और बाकी समय सूनसान पड़ी रहती हैं।
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कुनियां गांव का आधा हिस्सा रामगंगा में समाया
मिर्जापुर क्षेत्र में वर्ष 2010 में कहर बनकर आई बाढ़ में धारा बदल चुकी रामगंगा इस बार कुनियां गांव को अपने आगोश में समेटने को बेताब है। आधा गांव नदी में समा चुका है। कंठ किशोर, रामवीर, बृजपाल सिंह, शिवराम सिंह, वीरपाल सिंह, रामचंद्र सिंह, बृजेश सिंह, अवधेश सिंह आदि के मकानों से सटकर नदी बह रही है, जिससे किसी भी समय उनके घर नदी में समा सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के कहर से बचने के लिए न तो उनके पास कहीं जमीन है और न ही गृहस्थी बसाने को पैसा। इसलिए वे यहीं जियेंगे और यहीं मरेंगे। उधर हरिहरपुर, मौजमपुर, पहरुआ और मई खुर्दकलां आदि गांवों का हाल भी खराब है। हरिहरपुर मे नदी गांव के पूरब से कटाव कर रही है।
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बाढ़ से घिरा बीघापुर गांव, किराए की नाव का सहारा
रामगंगा के तटवर्ती ग्राम सिठौली के निकट से निकले नाले के पार बसे ग्राम बीघापुर जाने को कोई रास्ता नहीं है। गांव चारों ओर बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। ग्रामीण गेहूं पिसवाने तथा बाजार करने किराए की नाव से आते-जाते हैं। ग्रामीण विश्राम, सत्यपाल, जौहरी, रामकरन, रामस्वरूप, नरेश, बेंचेलाल, श्यामपाल, अशोक, रामसहाय, रामदास, शिवलाल आदि ने बताया कि ने डीएम से गांव के लिए नाव की व्यवस्था करवाये जाने की मांग की है।