रिकार्ड का मिलान, फर्जी निकला रेलवे की जमीन पर दावा
सहायक मंडलीय अभियंता ने शुरू कराई जमीन पर बेरीकेटिंग
मोदी की रैली वाली जमीन पर किसानों ने किया था अपना दावा
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। रोजा में मंडी समिति के सामने सैकड़ों एकड़ जमीन किसी अन्य की नहीं बल्कि रेलवे की है। इस जमीन पर किया जा रहा कुछ स्थानीय लोगों का दावा फर्जी निकला है। रेलवे रिकार्ड के साथ राजस्व रिकार्ड में भी यह जमीन रेलवे के नाम दर्ज है। रिकार्ड मिलान के बाद बृहस्पतिवार को सहायक मंडलीय अभियंता रॉकी तुहर ने मौके पर पहुंच कर बेरीकेटिंग का काम तेजी से शुरू करा दिया। हालांकि, कुछ लोगों ने दूसरे दिन भी विरोध किया लेकिन उनकी एक न चल सकी।
रोजा में मंडी समिति के सामने रेलवे की सैकड़ों एकड़ जमीन है। 21 जुलाई को इस जमीन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किसान कल्याण रैली हुई तो लोगों की नजर में यह जमीन आई। पास में ही रेलवे की कॉलोनी भी है। यहां रेल पटरी वेल्डिंग प्लांट प्रस्तावित है। इसके लिए रेल आवासों को तोड़ा जा रहा है। बुधवार को रेलवे की इस जमीन पर कर्मचारी बेरीकेटिंग करने पहुंचे तो कुछ स्थानीय लोग विरोध करते हुए इस जमीन पर अपना दावा करने लगे। इससे काम में रुकावट आई। कुछ समय के लिए रेल और राजस्व विभाग के अफसर भी दावे को लेकर संशय की स्थिति में आ गए। बृहस्पतिवार को रेलवे और राजस्व रिकार्ड के मिलान के बाद साफ हो गया कि जमीन रेलवे की संपत्ति है। इसके बाद रेलवे ने आरपीएफ, जीआरपी की मौजूदगी में यहां सख्ती के साथ बेरीकेटिंग कराने का काम चालू करा दिया है।
स्थानीय छुटभैया नेता दे रहे थे हवा
रेलवे की जमीन पर कब्जे के लिए कुछ स्थानीय छुटभैया नेता लोगों को उकसा रहे थे। जांच में यह भी पता लगा है कि जमीन पर विवाद खड़ा करके निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए ऐसा किया जा रहा था। छुटभैयों को लग रहा था कि किसी के पास जमीन संबंधी रिकार्ड न होने पर उनको फायदा हो सकता है। अब स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट होने के बाद छुटभैये भूमिगत हो गए हैं।
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वर्जन-
रेलवे और राजस्व विभाग के रिकार्ड का मिलान किया गया है। जमीन रेलवे की संपत्ति है। निजी संपत्ति के रूप में किए जा रहे दावे पूरी तरह से फर्जी हैं। रेलवे की संपत्ति पर अगर कब्जे की कोशिश की जाती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जमीन पर बेरीकेटिंग का काम लगभग पूरा हो चुका है।
- रॉकी तुहर, सहायक मंडलीय अभियंता उत्तर रेलवे