खुटार (शाहजहांपुर)। करोड़ों रुपये कीमत की चारागाह, खलिहान, खाद के गड्ढे आदि की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर प्लाटिंग की तैयारी कर रहे भू माफिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्थलीय निरीक्षण में एसडीएम और सीओ ने अवैध कब्जे के मामले में नगर पंचायत कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाते हुए जमकर फटकार लगाई और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
खुटार कसबे के बीच गोला मार्ग पर सरकारी जमीन पड़ी हुई है। रोड के किनारे और कसबे के बीच होने के कारण इस जमीन की कीमत करोड़ों में है। 15 दिन से इस जमीन पर पटाव कर प्लाटिंग की तैयारी की जा रही थी। इसमें खुटार के कुछ लोगों के अलावा पुवायां के लोग भी शामिल थे। शनिवार को एसडीएम अजय कुमार तिवारी और सीओ एमएस रावत मौके पर पहुंचे और लेखपाल से नक्शा मंगवाया तो पाया गया कि करोड़ों की कीमत की भूमि पर अवैध कब्जा हो रहा था। एसडीएम ने नगर पंचायत के लिपिक अनिल सिंह आदि ने अवैध कब्जा रुकवाए जाने के लिए की गई कार्रवाई के बारे में पूछा तो वह कोई जवाब नहीं दे सके। एसडीएम ने उन्हें कड़ी फटकार लगाते हुए भू माफिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने और मौके पर पड़ी निर्माण सामग्री को जब्त किए जाने के निर्देश दिए हैं।
कब्जा होता रहा, सोती रही पुलिस
पुवायां। खुटार में सरकारी जमीन पर कब्जे का काम लगभग 15 दिन से चल रहा था। इस दौरान जमीन पर भराव के लिए राखी डाली गई और पूरे मैदान को बराबर कराने के साथ ही नींव आदि भर दी गई। भाजपा नेता देवेश गुप्ता, मोहल्ला रायटोला के तमाम लोगों ने मामले की शिकायत अधिकारियोंसे की थी। एसडीएम ने खुटार पुलिस को तत्काल अवैध कब्जा रुकवाने के निर्देश दिए थे। पुलिस मौके पर गई और निर्माण कार्य बंद कराने के निर्देश देकर वापस लौट गई। इसके बाद भू माफिया ने निर्माण कार्य और तेजी से कराना शुरू कर दिया। एसओ बिरजाराम का कहना है कि एक बार काम करने से रोका गया था। बाद में काम फि र से शुरू होने की जानकारी नहीं मिल सकी। तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
पीडब्लूडी और वन विभाग के कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध
पुवायां। जिस जगह पर अवैध कब्जा किया जा रहा था, उसके आगे के हिस्से में पीडब्लूडी की जमीन है। कई वर्ष पूर्व भी जमीन पर कब्जे का प्रयास किया गया था। उस समय कब्जा रुकवा दिया गया था। इस बार पीडब्लूडी के अधिकारी, कर्मचारी ने कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी। इसके अलावा रोड के किनारे खड़े वन विभाग के तमाम पेड़ उजाड़ दिए गए, लेकिन वन महकमे के लोग भी चुप्पी साधे रहे।