शाहजहांपुर। 31 मई 1857 को अंग्रेज जिला कलेक्टर की हत्या के बाद एक जून को क्रांतिकारियों ने जिले में खान बहादुर खान की अगुवाई में रुहेला राज की घोषणा कर दी थी। साथ ही स्थानीय प्रशासन का गठन भी कर लिया गया था।
31 मई को कैंट स्थित सेंट मेरी चर्च में हुआ विद्रोही घटनाक्रम आने वाले एक बड़े तूफान की ओर ले गया था। एक साल से भी अधिक समय तक शाहजहांपुर युद्ध क्षेत्र बना रहा। चर्च में जिला मजिस्ट्रेट व अन्य यूरोपियों की हत्या के बाद विद्रोहियों ने शहर की ओर कूच कर दिया। शहर स्थित अंग्रेजों के घर जला दिए गए। किसी तरह बच निकलने वाले अंग्रेजों में व्यवसायी मिस्टर शील्ड, केरू कम्पनी के मालिक जीपी केरू व मिस्टर ब्रांड थे।
शील्ड ने अपने बयान में बताया कि उन्हें आभास था कि विद्रोही सैनिक धन के लालच में उनके घर हमला जरूर करेंगे। इसी प्रकार केरू फैक्टरी लूटी गई। उसे आग के हवाले कर दिया गया। केरू स्वयं चेतराम चौबे व कनेंग के राजपूतों की मदद से पहले मोहम्मदी बाद में लखनऊ पहुंचे। हालांकि वहां उनकी हत्या कर दी गई। ब्रांड भाग कर नेपाल पहुंच गए थे। नेपाल के बटवाल में बुखार से उनकी मृत्यु हो गई।
एक जून को विद्रोही सैनिकों ने जिले में अंग्रेजी राज की समाप्ति की घोषणा कर दी थी। अगले दिन निजाम अली को कोतवाल तथा कादिर अली खान एवं गुलाम हुसैन खान को संयुक्त मजिस्ट्रेट घोषित किया गया। कादिर अली खान ने ब्रिटिश राज की समाप्ति व खान बहादुर खान के नेतृत्व में जिले में रोहिला राज्य की स्थापना की घोषणा की। कैंट में तैनात सैनिकों के प्रति कृतज्ञता जताने के लिए एक जुलूस निकाला गया। कादिर अली खान ने अब अपने प्रबंध करना शुरू किए। अब्दुल रउफ को जिला सेना कमांडर बनाया गया। कैवेलरी पेंशनर नवाब हसमत अली खान को शस्त्रागार का प्रभारी बना दिया गया। निजाम अली खान के भाई हैदत्त खान सहित सभी कैदी जेल से रिहा कर दिए गए। वाजिद अली खान मुंसिफ दफ्तर बनाए गए।
तहसीलों में विद्रोह
शाहजहांपुर में विद्रोह की खबर लगते ही तिलहर, जलालाबाद, कटरा में विद्रोह शुरू हो गया। तिलहर में एक गुलाम मुहम्मद खान ने पुलिस स्टेशन सीज कर दिया व रिकॉर्ड जला दिए। कटरा में फैज मुहम्मद खान ने देसी बटालियन का गठन किया। जलालाबाद में अहमद यार खान ने विद्रोह का झंडा उठाया। वे तहसीलदार के पद पर कार्यरत थे किंतु उन्होंने कैदियों को छोड़ दिया। महीने भर बाद उन्हें नाजिम का पद दिया गया।
पुवायां, खुटार के राजाओं का अनुबंध
पुवायां के राजा जगन्नाथ सिंह ने इस अवसर पर तीस हजार रुपये नजराना खान बहादुर खान को भेजा और खुटार के राजा लाखन शाह ने उनसे मिलकर खुटार व पूरनपुर परगने अनुदान में प्राप्त कर लिए।
हामिद हसन खान व निजाम अली की भूमिका
जली कोठी के मालिक डिप्टी कलेक्टर हामिद हसन खान व पूर्व तहसीलदार निजाम अली को जिला प्रशासन में लिया गया। ये सारी कोशिशें इसलिये थीं कि आने वाले समय की तैयारी हो सके क्योंकि अगले दौर में शहर अंग्रेज कमांडर-इन-चीफ कैम्पबेल व प्रख्यात मौलवी अहमदउल्ला शाह के दरम्यान होने वाले रण का वाहक था।
नए जिला मजिस्ट्रेट ने तैयार की थी रिपोर्ट
एसएस कॉलेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. विकास खुराना बताते हैं कि 1857 में शाहजहांपुर में हुए विद्रोह व उससे संबंधित घटनाओं के प्रारंभिक स्रोत जिला मजिस्ट्रेट मिस्टर मनी व व्हेल के विस्तृत वर्णन है। ब्रिटिशकालीन गजेटियर लिखते समय इन्हीं विवरणों को आधार बनाया गया था। जिला मजिस्ट्रेट एम रिकरेट्स की हत्या के बाद जैंकिंज को प्रभारी अधिकारी घोषित कर दिया गया था जो स्वयं भी यहां से निकल चुके थे। किंतु बरेली, नैनीताल के कमिश्नरों व अन्य यूरोपीय अधिकारियों के संपर्क में बराबर बने रहे। जब जिला दोबारा अंग्रेजों के नियंत्रण में आया तब मिस्टर मनी नए जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त हुए। विद्रोह के समसामयिक विवरण इन्होंने ही जुटाए जिनकी बिना पर न केवल सरकारी रिपोर्ट तैयार की गई बल्कि विद्रोही सैनिकों पर ट्रायल इत्यादि चले।