शाहजहांपुर। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार शुक्ला महाविद्यालयों के रवैये से काफी आहत हैं। एसएस कॉलेज के अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में पहुंचे कुलपति ने अमर उजाला से बातचीत में साफ कहा कि विश्वविद्यालय का काम केवल प्रवेश कराना, परीक्षा कराना और परिणाम घोषित करना ही नहीं बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। वह इसको लेकर कोई समझौता नहीं कर सकते हैं।
वर्तमान सत्र में ऑनलाइन प्रवेश से उपजे संकट के सवाल पर कुलपति ने कहा कि कॉलेज की सीटें भरना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए सभी को अपनी दशा सुधारनी होगी। विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित होने वाले कॉलेजों की संख्या 51 से बढ़कर 551 तक पहुंच चुकी है। अब आंख बंद करके कोई शिक्षा की दुकानें नहीं चला सकता। इसके लिए क्वालिटी देनी होगी, ताकि बच्चे इधर-उधर नहीं भागें। प्रोफेसर शुक्ला ने स्पष्ट किया कि एडेड (अनुदानित) महाविद्यालयों का कंपटीशन प्राइवेट संस्थाओं से है, ऐसे में कोई भी कॉलेज अपनी मनमानी नहीं कर सकता। कुछ नियम-कानून होते हैं, जो सभी को मानने पड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि कंपटीशन युग में कोई भी किसी का इंतजार नहीं कर सकता। अनुदानित कॉलेजों को प्राइवेट संस्थाओं से उन्हीं की भाषा अपनाकर कंपटीशन करना होगा। कुलपति ने बदइंतजामी के सवाल पर कहा कि से कॉलेज की संबद्धता के बाद सभी को यूनिवर्सिटी से मन से जुड़कर एक-दूसरे का पारस्परिक सहयोग करना होगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में हालत यह है कि किसी कॉलेज में शिक्षक नहीं हैं, तो कहीं शिक्षकों को उचित वेतन नहीं दिया जा रहा है। वह किसी भी कॉलेज को फीस कलेक्शन सेंटर (शुल्क संग्रह केंद्र) नहीं बनने देंगे। कहा, वह मार्च में ही परीक्षाएं कराने की तैयारी कर रहें हैं और कराएंगे। नवीन सत्र में स्नातक कक्षाओं में 10 जुलाई तक और पीजी कक्षाओं 30 जुलाई तक प्रवेश कराएंगे। वर्षभर प्रवेश लेने की परंपरा को अब और नहीं चलने दिया जाएगा।