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मंडियों और क्रय केंद्रों पर 34 हजार मीट्रिक टन गेहूं भीगने की आशंका

Thu, 07 Jun 2018 01:57 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,शाहजहांपुर
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गेहूं की बंपर पैदावार के कारण इस बार मूल्य समर्थन योजना के तहत सरकारी खरीद अभी तक रफ्तार पकड़े है, जबकि मानसून की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। इस वर्ष खरीद लक्ष्य 2.65 लाख हेक्टेयर के सापेक्ष 246970 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। इसे केंद्र प्रभारियों की लापरवाही कहें या फिर लचर परिवहन व्यवस्था का नतीजा कि अभी तक सरकारी गोदामों में बमुश्किल 2.11 लाख मीट्रिक टन गेहूं पहुंच पाया है। शेष करीब 34 हजार मीट्रिक टन गेहूं मंडियों और क्रय केंद्रों पर खुला पड़ा है। बुधवार को मौसम विभाग द्वारा तेज वर्षा के बारे में व्यक्त किया गया पूर्वानुमान सच साबित होने पर भारी मात्रा में गेहूं के भीगकर खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
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2.90 लाख मीट्रिक टन हुई गोदामों की भंडारण क्षमता
गत वर्ष मूल्य समर्थन योजना के तहत जिले में 5.03 लाख मी. टन लक्ष्य के सापेक्ष 1.82 लाख मी. टन गेहूं की खरीद हुई थी। इस वर्ष गेहूं खरीद नीति के तहत कुल उत्पादन के सापेक्ष समर्थन मूल्य पर सिर्फ 25 प्रतिशत खरीद करने का निर्णय किया गया। उसी अनुपात में खरीद लक्ष्य घटाकर 2.65 लाख मी. टन नियत किया गया जबकि इस वर्ष 2.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में 11.26 लाख मी. टन गेहूं पैदा होने का अनुमान है। भंडारण के लिए भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों ने 2.90 लाख मी. टन क्षमता के गोदामों की व्यवस्था की है। जाहिर है कि समस्या गेहूं के भंडारण की नहीं बल्कि खरीदा गया गेहूं समय रहते गोदामों तक पहुंचाने की है।

गेहूं में नमी के प्रभाव से कीट-रोगों का बढ़ेगा प्रकोप
कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मानसून सीजन में गेहूं को न केवल सीधी बारिश से बचाना जरूरी है, उपज का भंडारण ऐसी जगह किया जाना चाहिए जहां नमी बिल्कुल नहीं पहुंचे। मंडियों में स्थापित क्रय केंद्रों के कई प्रभारियों ने खरीद गया गेहूं गोदामों पर पहुंचाने के बजाय मंडियों में खाद्यान्न रखने के लिए बनाए गए शेड के नीच इकट्ठा करा दिया है। चूंकि, गेहूं की बोरों में पैकिंग नहीं की गई है। इसलिए तेज बारिश होने की दशा में गेहूं के ढेर नमी की चपेट में आएंगे। कृषि विज्ञान केंद्र के शस्य वैज्ञानिक डॉ. कृष्ण मोहन सिंह के अनुसार ऐसी दशा में घुन और दीमक आदि हानिकारक कीट उपज को नुकसान पहुंचाएंगे। उन्होंने इस स्थिति से बचाव के लिए खुले में रखा गेहूं जल्द से जल्द पैक कराकर पेस्टीसाइड्स से उपचारित गोदामों में पहुंचान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसान भाई गेहूं को धूप में भली प्रकार सुखा लें और उसे बुखारियों में भरने से पहले नीचे नीम की पत्तियां बिछा दें। भंडारित गेहूं के बीच में सल्फास का पाउच रखने से अन्य कीट-रोग भी हमला नहीं कर पाएंगे।
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जिले में लक्ष्य के सापेक्ष 93 प्रतिशत गेहूं खरीद हो चुकी है। पहले भंडारण की समस्या रही, लेकिन इस वर्ष गेहूं को खराब होने से बचाने के लिए कई प्राइवेट गोदाम भी किराए पर लिए गए हैं। अभी क्रय केंद्रों के माध्यम से 34 हजार मीट्रिक टन गेहूं का भंडारण होना शष है, जबकि गोदामों में इससे अधिक गेहूं रखने को स्पेस उपलब्ध है। केंद्र प्रभारियों को गेहूं जल्द से जल्द गोदामों में भंडारित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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-जिया अहमद करीम, उप संभागीय विपणन अधिकारी
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