करीब एक दशक तक मनोरंजन के प्रमुख साधन रहे सिनेमाघर अब बीते जमाने की बात हो गए हैं। सरकार बंद हो चुके सिनेमाघरों को फिर से चालू कराने के साथ नए सिनेमाघर खोलने के लिए कई तरह की प्रोत्साहन परक योजनाएं चला रही है। इसके बाद भी सिनेमाघरों को लेकर कारोबार उदासीन हैं। एक दशक में जिले में 16 सिनेमाघर बंद हो चुके हैं। शहर में सिर्फ एक ही सिनेमाघर बचा है जो चल रहा है।
सिनेमाघर मनोरंजन के साथ रोजगार के साधन भी हुआ करते थे। समय के साथ बदलाव हुए। इंटरनेट युग, के साथ केबिल व्यवसाय और डीटूएच तकनीक के हाबी होने के साथ ही इस व्यवसाय की हालत पतली होती गई। सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ घटने के साथ कई तरह के टैक्स और सिनेमाघरों में नई डिजिटल महंगी तकनीक ने कारोबारियों के हौसले तोड़ दिए। सिनेमाघर घाटे का व्यवसाय हो गया। धीरे-धीरे जिले के 17 में से 16 सिनेमाघर बंद हो गए। सबसे ज्यादा छह सिनेमाघर शहर में बंद हुए। सिनेमा व्यवसाय को फिर से पटरी पर लाने के लिए सरकार ने कई प्रोत्साहन परक योजनाएं चालू की हैं। इनमें नया सिनेमाघर या मल्टीप्लेक्स खोलने पर छह साल तक शत प्रतिशत टैक्स में छूट की व्यवस्था की गई है। बंद पुराने सिनेमाघर को फिर से उसी स्थिति में चालू करने पर भी 75 प्रतिशत तक की टैक्स छूट चालू की गई है। इसके साथ सिनेमाघर के पुराने भवन को तोड़कर कामर्शियल कॉम्पलेक्स निर्माण कराने और इसमें एक या दो स्क्रीन का सिनेमाघर खोलने पर भी प्रोत्साहन योजनाएं लागू की गई हैं। कई तरह की प्रोत्साहनपरक योजनाएं लागू किए जाने के बाद में सिनेमा व्यवसाय में न तो नया कारोबारी आना चाहता है और न ही कोई पुराना कारोबारी फिर से सिनेमाघर चालू करने का इच्छुक है।
केबिल और डीटूएच भी रही एक प्रमुख वजह
- गांव से लेकर देहात तक केबिल नेटवर्क और डीटूएच (डायरेक्ट-टू-होम) का जाल बिछा है। जिले में 27 पंजीकृत केबिल ऑपरेटर हैं। ज्यादातर घरों में केबिल कनेक्शन या डीटूएच डिश टीवी लगी है। इन पर ऐसे चैनल्स की भरमार रहती है, जो 24 घंटे मनोरंजन के कार्यक्रमों का प्रसारण करते हैं। इसके चलते भी लोगों का सिनेमाघरों की ओर रुझान कम हुआ और धीरे-धीरे यह घाटे का व्यवसाय बन गया। हालांकि, मनोरंजन कर विभाग को उम्मीद है कि नई प्रोत्साहन परक योजनाएं लागू होने से सिनेमाघर व्यवसाय को गति मिलेगी।
घट गई मनोरंजन कर विभाग की आय
जिले में एक-एक कर 16 सिनेमाघर बंद होने से मनोरंजन कर विभाग की आय में भी गिरावट आई है। हालांकि, केबिल व्यवसाय ने मनोरंजन कर विभाग को कुछ संभाला है। सिनेमाघरों ने हर साल मनोरंजन कर विभाग को मिलने वाला टैक्स अब नहीं मिलता। विभाग में पहले जितना काम भी नहीं रहा है।
बंद हुए सिनेमाघर-
शाहजहांपुर-6, जलालाबाद-2, कटरा-2, पुवायां-2, तिलहर-2, खुटार-1, बंडा-1, कांट-1
सिनेमाघर व्यवसाय को फिर से खड़ा करने के लिए सरकार ने कई प्रोत्साहनपरक योजनाएं चालू की हैं। इनमें 75 से 100 प्रतिशत तक की टैक्स छूट की व्यवस्था है। टैक्स छूट छह साल के लिए होगी। अगर कोई व्यवसायी नया मल्टीप्लेक्स खोलना या फिर पुराने सिनेमाघर को चालू करना चाहता है, तो वह विभाग से संपर्क कर योजना का लाभ उठा सकता है।
- शैलेंद्र कुमार, जिला मनोरंजन कर अधिकारी