शाहजहांपुर। स्मॉग की गिरफ्त में मंगलवार को पूरा जिला रहा। इससे यातायात भी प्रभावित हुआ। दृश्यता कम होने की वजह से रफ्तार पर भी असर पड़ा। मौसम के जानकारों के मुताबिक हवा का दबाव कम होने की वजह से धूल के कण आने से स्मॉग के हालात पैदा हुए हैं। दिन भर धूप न निकलने की वजह से रात के मुकाबले दिन के तापमान में भी मंगलवार को मामूली गिरावट दर्ज की गई।
पिछले एक सप्ताह से मौसम में उतार-चढ़ाव आ रहा है। सुबह-शाम तापमान कम और दोपहर में ज्यादा रह रहा है। मंगलवार सुबह से ही मौसम से पलटी मारी। दिन की शुरुआत धुंध के साथ हुई। वातावरण में दिन भर स्मॉग छाया रहा। स्मॉग के कारण सांस और दमा के रोगियों के लिए समस्या रही। मौसम विज्ञानी आलोक सागर गौतम के मुताबिक हवा में नमी मिली होती है। अगर तापमान अचानक कम होता है तो हवा की नमी पानी के बेहद ही छोटे कणों में बदल जाती है। पानी के यही छोटे कण वातावरण में में छा जाते हैं। आमतौर पर स्मॉग का असर दोपहर बाद या फिर शाम में देखा जाता है, लेकिन सर्दियों के दिनों में अगर वातावरण में हवा की कमी हो जाए तो स्मॉग सुबह से लेकर शाम तक रहता है। स्मॉग सबसे ज्यादा अस्थमा और सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को परेशानी पैदा करता है। स्मॉग में छिपे कण अस्थमा के अटैक की आशंका को बढ़ा देते हैं। मंगलवार को दिन भर वातावरण में स्मॉग छाए रहने की वजह से रेलगाड़ियों की रफ्तार पर भी असर देखा गया।
धूल के कण हवा में जमा हो जाने के कारण स्मॉग के हालात पैदा होते हैं। स्मॉग में कोहरे और धुएं के अलावा कई तरह के केमिकल कण होते हैं। यह सांस और दमा के रोगियों के लिए घातक होता है।
-सुरेंद्र सिंह, मौसम विश्लेषक गन्ना शोध परिषद