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इलेक्ट्रानिक डिवाइस से लैस विदेशी पक्षी मिलने से हड़कंप

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इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से लैस विदेशी पक्षी मिलने से हड़कंप
वन विभाग ने यूरेशिया के प्रवासी पक्षी के रूप में की पहचान
विवेकानंद कॉलेज प्रांगण में घूम रहा था सारस जैसा पक्षी
अमर उजाला ब्यूरो
अल्हागंज। कस्बा के स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज के प्रांगण में इलेक्ट्रानिक डिवाइस से लैस विदेशी पक्षी मिलने से हड़कंप मच गया। स्थानीय लोग पक्षी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं करने लगे। सूचना पर वन विभाग की टीम भी पहुंच गई। वन विभाग की पड़ताल के बाद साफ हो गया कि सारस जैसा दिखने वाला विदेशी पक्षी डेमोइजेल क्रेन है। यह प्रजाति सेंट्रल यूरेशिया में पाई जाती है। सर्दियों के दिनों में अक्तूबर से जनवरी तक यह पक्षी शाहजहांपुर समेत पीलीभीत, हरदोई, बदायूं, लखीमपुर खीरी के झील और नदियों वाले इलाकों में प्रवास करता है। स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज के प्रांगण में कई दिनों से लोग सारस जैसा एक पक्षी देख रहे थे। इसके दोनों पैरों पर उपकरण लगे थे। स्थानीय लोगों में अफवाह फैल गई कि वह कोई विदेेशी पक्षी है जो जासूसी करने के लिए भेजा गया है। उसके पैरों पर सीसी कैमरे लगे हुए हैं। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को भी दी। वन विभाग के महाराम ने बुधवार को अल्हागंज पहुंच कर इस पक्षी को कब्जे में ले लिया। इसे जिला मुख्यालय लाने के बाद पड़ताल की गई। पक्षी के पैरों पर एक सोलर पैनल, एक पीपीटी डिवाइस बंधी होने के सिल्वर का एक छल्ला भी पड़ा था। कुछ ही समय में पूरी पड़ताल हो गई।
मुख्य रूप से सेंट्रल यूरेशिया के साथ साइबेरिया, मंगोलिया, उत्तर पूूर्वी चीन और तुर्की में पाया जाना वाला डेमोइजेल क्रेन नाम का यह पक्षी हर वर्ष चार महीने के प्रवास पर भारत आता है। उत्तर भारत में नदी और झील वाले इलाकों में इसका मुख्य रूप से प्रवास होता है। स्थानीय भाषा में इसे कुंज भी कहते हैं। पक्षी के पैर पर बांधी गई डिवाइस उसकी लोकेशन और हजारों किलोमीटर की यात्रा रूट को ट्रैक करने के लिए होता है। सोलर पैनल के जरिये इसे चार्ज किया जाता है। पैर में सिल्वर रिंग के जरिए इस दुर्लभ पक्षी की पहचान होती है कि वह किस देश और किस बैच का पक्षी है।
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विदेशी पक्षियों को रास आ रही शाहजहांपुर की आब -ओ-हवा
डीएफओ बोले, प्रवासी पक्षी विदेशी मेहमान, न करें छेड़छाड़
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। विदेशी पक्षियों के लिए शाहजहांपुर की आब-ओ-हवा रास आ रही है। वाइल्ड लाइफ के लिए यह शुभ संकेत है। हजारों किलोमीटर की यात्रा पूरी कर यहां पहुंचे विदेशी पक्षी डेमोइजेल क्रेन को वन विभाग विदेशी मेहमान मानता है। डीएफओ गोपाल ओझा ने लोगों से अपील की है कि विदेशी पक्षियों का स्वागत करें। इनके साथ छेड़छाड़ बिल्कुल न करें। जासूसी संबंधी बातें पूरी तरह से अफवाह हैं।
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मुख्य रूप से साइबेरिया, यूरेशिया, चाइना, तुर्की और मंगोलिया में पाया जाने वाला यह मेहमान हजारों किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ईरान, अफगानिस्तान होने हुए चार महीने के प्रवास पर यहां पहुंचा है। दिखने में बतख से बड़ा होता है। भारतीय भाषा में कुंज नाम से पहचान रखने वाला यह पक्षी काफी समझदार होता है। यह पक्षी यहां चार महीने तक नदी और झीलों के किनारे प्रवास करेगा। खेतों में अनाज के दाने और कीट इनका भोजन होता है। खुशी के वक्त कूंज डांस करता है। नदियां, झील और तालाब के बहुतायत वाले शाहजहांपुर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी कूंज के पसंद के इलाके हैं। इसके अलावा पीलीभीत में टाइगर रिजर्व और लखीमपुर में दुधवा नेशनल पार्क होना भी कूंज को यहां प्रवास के लिए आकर्षित करता है।
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