होली के दौरान बेमौसम बारिश से हुए फसली नुकसान से जिले के किसान उबर भी नहीं पाए कि हाल ही में दोबारा हुई बारिश से रही-बची फसलें चौपट हो गई। पहले दौर की बारिश में महज 25 फीसदी फसली नुकसान आंकने वाले प्रशासनिक अधिकारी भी मानते हैं कि दोबारा हुई बरसात से नुकसान बढ़कर 40 फीसदी हो गया है। इसलिए किसानों के आंसू पोंछने केलिए शासन से आपदा राहत मद में 16.85 करोड़ रुपये की धनराशि मांगी गई है।
बता दें कि गत मार्च माह के अंतिम सप्ताह में प्रशासन ने जिले के किसानों को फसली मुआवजा देने के लिए शासन को 3.71 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी थी। दरअसल, उस वक्त 2335 राजस्व गांवों में कराए गए गाटा वार सर्वे में रबी सीजन की गेहूं, चना, मटर, सरसों आदि 64861.06 हेक्टेयर फसलें असमय की बारिश से प्रभावित पाई गईं। बावजूद इसके प्रशासन ने फसली नुकसान केवल 25 फीसदी आंका और उसी के अनुरूप शासन से धनराशि की मांग की थी।
उधर, पिछले दो दिन में मौसम के बिगड़ैल तेवर से रही-बची फसलें भी चौपट हो गईं। फसलों पर दूसरे दौर की आंधी-बारिश का असर जांचने के लिए तीसरी बार कराए गए सर्वे से फसली नुकसान 15 प्रतिशत बढ़ जाने की पुष्टि हो गई। एडीएम (वित्त एवं राजस्व) पीके श्रीवास्तव ने बताया कि लेखपालों और कृषि विभाग से मिली हालिया रिपोर्ट से पता चला कि जिले में फसलों को 40 प्रतिशत नुकसान हो चुका है। एडीएम के अनुसार इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर शासन को 16.85 करोड़ रुपये की संशोधित डिमांड भेजी गई है जिसमें पहले मांगी जा चुकी धनराशि भी शामिल है।