अपनी चुटीली हास्य-व्यंग्य रचनाओं से कुरीतियों पर प्रहार करने वाले कवि चरनजीत सिंह दारूवाला कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो गए हैं। उनके बीमार होने से साहित्यकारों और कवियों में बेचैनी है। कई साथी घर जाकर दारूवाला का हालचाल लेकर उन्हें सांत्वना दे रहे हैं।
कवि सम्मेलनों में लोगों को हंसा हंसाकर लोटपोट कर देने वाले दारूवाला के चेहरे की हंसी कैंसर ने छीन ली है, लेकिन वह पूरी जिंदादिली से कैंसर से लड़ रहे हैं। उनसे मिलने जाने वाला बीमारी को बड़ा बताकर भले ही चेहरे पर निराशा के भाव लाए, लेकिन श्री दारूवाला उल्टे उसे ही समझाने लगते हैं। बातचीत में दारूवाला ने कहा कि इस भागमभाग जिंदगी में जनहित के कार्यों को नि:स्वार्थ भाव, ईमानदारी और मानवीय संवेदनाओें को समझकर काम करना ही सच्ची समाजसेवा है। टूटते परिवार, समाज में बढ़ती कलह के समय में दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाना सबसे बड़ा पुण्य का काम है और उन्हें गर्व है कि उन्होंने पूरी मेहनत और लगन से इस कार्य को किया।
‘होली खेली मुसीबत मोल ले ली’, ‘कन्या भ्रूण हत्या यदि रुकी नहीं तो...’ जैसी कविताएं जब वह मंच पर पढ़ते हैं तो लोग हंसी के साथ ही सोचने पर भी विवश हो जाते हैं। कवि डॉ. रामबूबाबू शुक्ल, रामलड़ैते श्रीवास, विजय तन्हा, आशीष शुक्ल, मानवेंद्र प्रताप सिंह, सुधीर बादल, तेजपाल जोशी सहित तमाम कवियों ने उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।