यूनाइटेड स्प्रिट लिमिटेड रोजा शराब फैक्ट्री में पिछले छह दिन से क्रमिक अनशन पर बैठे मजदूरों का गुस्सा अब उबाल खाने लगा है। उनकी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर न तो फैक्ट्री प्रबंधन और न ही प्रशासन संजीदा है। शनिवार रौसरकोठी स्थित शराब फैक्ट्री गेट पर अस्थाई श्रमिकों की पंच समिति ने मजदूरों के साथ जमकर हंगामा काटा और नारेबाजी कर श्रमिक नेता उमेश कुमार व सत्यप्रकाश के साथ अनशन पर बैठ गए।
बता दें कि यूनाइटेड स्प्रिट लिमिटेड रौसरकोठी में 156 दैनिक वेतनभोगी अस्थाई मजदूर हैं जो पिछले 35 साल से यहां काम कर रहे हैं उनको स्थाई नहीं किया। शराब फैक्ट्री ही इन मजदूरों के परिवार के रोजगार और भरण पोषण का एक मात्र सहारा थी।
अस्थाई श्रमिक पंचशील समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार ने शराब फैक्ट्री गेट पर प्रदर्शन के दौरान प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि यहां 156 अस्थाई श्रमिकों को पिछले छह माह से मजदूरी नहीं मिली और लेवर कांट्रैक्टर को भरपूर काम दिया जा रहा है।
श्रमिक नेता का आरोप था कि 60 साल की आयु पार कर चुके अस्थाई कर्मियो को उनका फंड और पेंशन नहीं दी गई है। इसमें इन मजदूरों के परिवार भुखमरी के कगार पर हैं।
पंचसमिति ने अपने मांग पत्र में प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि छुट्टियों में श्रमिको ने फैक्ट्री चलाने में भरपूर सहयोग दिया था। इसका पैसा नहीं दिया गया और कार्य के दौरान मजदूर के चोट लगने में न तो छुट्टी दी जाती थी न ही कोई इलाज का व्यय ऐसी, स्थिति में मजदूर के सामने आगे कुआं पीछे खाई जैसी स्थिति है।
श्रमिकों द्वारा अपनी मांग को लेकर चलाए जा रहे अनशन के बारे में शराब फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि उनकी फैक्ट्री जुलाई 2013 से बंद चल रही है। ऐसी स्थिति में मजदूरों से कैसे काम लिया जा सकता, लेकिन लेवर कांट्रेक्टर के द्वारा काम कराए जाने की बात का उत्तर फिलहाल उनके पास नहीं था।