पुवायां। ग्रामसभा नाहिल में जंगल झाड़ी की भूमि पर किए गए अवैध निर्माण की जांच के लिए दो मार्च को गठित टीम 15 दिन में दस किमी की दूरी भी तय नहीं कर सकी। टीम को तीन दिन में तहसीलदार को रिपोर्ट देनी थी, लेकिन अब तक मौके का निरीक्षण तक नहीं किया गया।
सुरक्षित श्रेणी की इस भूमि पर गलत तरीके से पट्टे कर दिए गए थे। तत्कालीन अधिकारियों की लापरवाही से पट्टा धारकों को भूमिधरी का अधिकार भी दे दिया गया। गांव के नवनीत मिश्रा ने शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। अमर उजाला ने मामले को प्रमुखता से उठाया तो तहसीलदार ने 19 फरवरी को पट्टा निरस्तीकरण की रिपोर्ट भेजने का दावा करते हुए कार्रवाई शुरू करने की बात कही।
इसके विपरीत करोड़ों की सरकारी भूमि पर अवैध रूप से संजयनगर नाम से बनाए गए बाजार के मामले में एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो आदि मौके पर निरीक्षण करने तक नहीं गए। जंगल झाड़ी की जमीन पर किसने कितना निर्माण कराया, इसका सत्यापन भी नहीं कराया। आरोप था कि प्रशासन जानबूझकर पहले की तरह मामले को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी कर रहा है।
अमर उजाला ने अधिकारियों के निरीक्षण न करने के मामले को भी प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद तहसीलदार मनोज कुमार सिंह ने दो मार्च को कानूनगो मनोज सक्सेना, लेखपाल उपेंद्र तिवारी, गिरीश त्रिवेदी, मयंक गुप्ता की टीम का गठन किया था। टीम को नाहिल के संजयनगर में जांच करनी थी कि जंगल झाड़ी की भूमि पर किनके पट्टे हुए थे, पट्टाधारक कहां के थे और वर्तमान में कहां हैं। जंगल झाड़ी की भूमि पर निर्माण पट्टाधारकों का है कि दूसरे लोगों ने निर्माण करा रखा है।
टीम के जांच के लिए संजयनगर नहीं पहुंचने पर तमाम सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन चाहता तो वर्षों पहले ही सरकारी भूमि खाली हो सकती थी, लेकिन अधिकारी मामले में हाथ नहीं डालना चाहते हैं। कारण है कि कई पूर्व अधिकारी और कर्मचारी मामले में फंस रहे हैं।
अभी रिपोर्ट नहीं मिली है। पता किया जाएगा कि टीम ने अभी तक जांच क्यों नहीं की। अगर जांच नहीं हुई तो जल्द ही जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-मनोज कुमार सिंह, तहसीलदार, पुवायां