सही कराई गईं सड़कों में हुए भ्रष्टाचार के गड्ढे
संपर्क मार्ग बदहाल, शहरी इलाकों में उखड़े स्टेट हाईवे
घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल, समय से पहले टूटीं सड़कें
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच कराना जरूरी नहीं समझते अफसर
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
जिले में ज्यादातर ग्रामीण संपर्क मार्गों और स्टेट हाईवे की दशा खराब है। योगी सरकार के गड्ढामुक्त अभियान को अभी एक साल भी नहीं बीता है और सड़कें जवाब दे गईं। ऐसा घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल के चलते हुआ है। लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड के तहत आने वाली प्रधानमंत्री ग्राम्य सड़क योजना की सड़कों के साथ प्रांतीय खंड के अधीन आने वाले स्टेट हाईवे की भी दशा खराब हो रही है। गड्ढा मुक्त अभियान में मोटा बजट खपाया गया था। एक साल के भीतर ही इसकी पोल खुलने लगी है। जिले में करीब 147 किमी नेशनल हाईवे और 214 किमी स्टेट हाईवे हैं। नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण का काम नेशनल हाईवे अथारिटी कर रही है।
तिलहर नगर के मोहल्ला दातागंज के पूर्वी पूर्वी से लेकर पीरगाह तालाब, सरस्वती विद्या मंदिर होते हुए पक्का कटरा तक जाने वाला मार्ग अरसे से उखड़ा पड़ा है। गड्ढा मुक्त अभियान के दौरान भी इस मार्ग की दशा नहीं सुधर सकी। बताते हैं कि मार्ग निर्माण का टेंडर पिछले वर्ष निकाला गया था। इसका ठेका सपा के एक नेता के संबंधियों को दिया गया था। अब तक मार्ग निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
राजनपुर रोड के पास इमली मोहल्ले को जाने वाला मार्ग जर्जर है। मोहल्ला मौजमपुर से पुराने रोडवेज को जाने वाले मार्ग समेत कई ऐसे संपर्क मार्ग हैं जिनकी कोई सुध नहीं ले रहा। नगर पालिका ईओ सर्वेश कुमार कुशवाहा का कहना है कि कई सड़कें हॉट मिक्स बनाई जानी हैं। जल्द ही इनका काम शुरू होगा।
अल्हागंज में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अडियल रुख के चलते हुल्लापुर बाया साहेबगंज की दशा काफी खराब है। गड्डा मुक्त सड़क अभियान के दौरान भी लोक निर्माण विभाग ने इस मार्ग को ज्यों का त्यों छोड़ दिया था। विधायक शरदवीर सिंह का कहना है कि समस्या को देखते हुए अल्हागंज-हुल्लापुर वाया साहेबगंज दलदली मार्ग बनवाने का प्रस्ताव उन्होंने भेजा था। यह शासन स्तर पर लंबित है। बजट मिलने के बाद काम चालू होने की उम्मीद है।
मीरानपुर कटरा में कटरा रेलवे स्टेशन के नजदीक से गुजरने वाले मार्ग को कटरा-उखली संपर्क मार्ग के नाम से जाना जाता है। यह मार्ग क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों को जोड़ता है। कई साल से इस मार्ग की दशा खराब है। क्षेत्र में यह सड़क भी मरम्मत को तरस रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग ने कुछ महीने पहले मार्ग की मरम्मत के नाम पर खाना-पूरी कर दी। घटिया निर्माण सामग्री लगाए जाने की वजह से मार्ग की दशा फिर से खराब हो गई है। इसका खामियाजा दो दर्जन से ज्यादा गांवों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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गड्डा मुक्ति अभियान में सामने आ चुका भ्रष्टाचार
सड़कों को गड्डा मुक्त कराने के लिए चलाए गए अभियान के दौरान जिले में भ्रष्टाचार भी उजागर हुआ था। मामले का खुलासा होने पर तत्कालीन डीएम ने कार्रवाई भी की थी। दरअसल, बरतारा सिमराई मार्ग से सरैंया आबाद के लिये जाने वाली सड़क का निर्माण अगस्त 2016 में पीडब्ल्यूडी ने कराया गया था। सूबे में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद गड्डा मुक्त सड़कों के लिए अभियान चलाया गया। इस दौरान मंडी परिषद ने सरकार के गड्ढा मुक्ति अभियान में इस बनी हुई सड़क को शामिल करा दिया। अप्रैल 2017 को 12.27 लाख रुपये का कूट रचित स्टीमेट बनाकर ठेकेदार से काम शुरू करा दिया गया।
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सितंबर 2016 में 100 करोड़ से बने थे ग्रामीण संपर्क मार्ग
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत केंद्र सरकार ने जिले की 35 ग्रामीण सड़कों का निर्माण को 100 करोड़ रुपये की लागत से कराया था। केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णाराज ने करीब 150 किलोमीटर सड़कों का लोकार्पण सितंबर 2016 में किया था। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई जाने वाली इन सड़कों की गुणवत्ता को लेकर सख्त चेतावनी भी दी गई थी। गौर करने वाली बात यह है कि दो साल में ही 100 करोड़ की लागत से बनीं करीब 150 किमी लंबी 35 सड़कें घटिया निर्माण सामग्री की भेंट चढ़ गईं। इनमें ज्यादातर सड़कें अब जर्जर हो चुकी हैं। यह ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं।
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वर्जन-
विभाग के अधीन जो भी सड़कें आती हैं जरूरत के हिसाब से उनकी मरम्मत कराई जाती है। फिर से निर्माण के लिए प्रस्ताव दिए जाते हैं। सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाता है। अगर कहीं कोई शिकायत है तो उसे दिखवाया जाएगा।
-ओपी वर्मा, अधिशासी अभियंता