दोहरी शिक्षा नीति के विरोध में सड़क पर उतरे दलित संगठन
राष्ट्रीय बहुजन सामाजिक परिसंघ के नेतृत्व में किया प्रदर्शन
फोटो 01 में।
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। सकार की दोहरी शिक्षा नीति में देश काल की परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव नहीं किए जाने के विरोध में दलित और पिछड़े वर्गों के संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता बृहस्पतिवार को सड़क पर उतर आए। उन्होंने राष्ट्रीय बहुजन सामाजिक परिसंघ के नेतृत्व में जुलूस निकालकर कलक्ट्रेट में जमकर नारेबाजी की। साथ ही एसडीएम सदर रामजी मिश्रा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर दलितों-पिछड़ों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा शिक्षा नीति में संशोधन किए जाने की मांग की।
प्रदर्शन के लिए मूल निवासी विचार मंच, बहुजन युवा शक्ति संघ आदि संगठनों के कार्यकर्ता सुबह से टाउनहाल स्थित शहीद प्रतिमाओं के पास इकट्ठा होने लगे। वहां से कार्यकर्ता हाथों में जोशीले नारे लिखी तख्तियां लेकर परिसंघ के जिला संयोजक सुरेश चंद्र कठेरिया के नेतृत्व में कचहरी की ओर बढ़ चले। जुलूस सदर चौराहे पर पहुंचा तो वहां कुछ देर को ट्रैफिक ठहर गया। बाद में कार्यकर्ताओं का हुजूम नारेबाजी करता हुआ कलक्ट्रेट पहुंचा और वहां सभा करके सरकार पर दलितों को समाज की मूल धारा से दूर रखने की साजिश में लिप्त होने का आरोप लगाया।
संयोजक कठेरिया ने कहा कि दोहरी शिक्षा नीति के सहारे शोषित जातियों और वर्गों को शैक्षिक योग्यता की दृष्टि सेे पीछे धकेला जा रहा है। उन्होंने समान शिक्षा नीति की वकालत करने वाली कोठारी आयोग की रिपोर्ट को लागू किए जाने की मांग की। जगदीश प्रसाद ने कहा कि मौजूदा शिक्षा नीति का मूक समर्थन करने वाले लोग वंचितों के लिए शत्रु समान हैं। मूल निवासी विचार मंच के संयोजक महबूब हुसैन इदरीसी ने कहा कि देश के शोषितों और वंचितों में अब अपने अधिकारों के प्रति पैदा हो रही जागरूकता भविष्य के लिए शुभ संकेत है।
इस मौके पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउंसिल के सदस्य सुरेश कुमार उर्फ नेताजी और जिला सह सचिव रामशंकर ने परिसंघ की मांग का समर्थन किया। जुलूस और प्रदर्शन में सुरेश पाल सिंह, गंगा राम कटेरिया, ब्रजेश गंगवार, नरवीर, शिशुपाल वर्मा आदि शामिल रहे।