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धुवला करीमनगर गांव के अस्तित्व पर कटान से मंडराए संकट के बादल

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धुवला करीमनगर गांव के अस्तित्व पर कटान का संकट
रामगंगा से भूमि का कटान हुआ तेज, भैंसार बांध पर गंगा में उफान
दवाएं उपलब्ध नहीं होने से बीमारियों से परेशान हो रहे बाढ़ प्रभावित
फोटो 19 व 20 में।
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर/जैतीपुर/मिर्जापुर/परौर।
कटरी क्षेत्र से होकर बह रही रामगंगा के जल स्तर में शनिवार को दूसरे दिन भी 38 सेमी की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन उतार पर बाढ़ के पानी की रफ्तार बढ़ने से जलालाबाद एवं कलान तहसील के मिर्जापुर और परौर क्षेत्र के तटीय इलाकों में कृषि भूमि का कटान तेज हो गया है। इस बीच, भैंसार बांध पर गंगा दस सेमी उफनाकर 143 मीटर पर पहुंच गई है। नरौरा समेत अन्य बैराजों से 1.44 लाख क्यूसेक पानी की निकासी और नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र में हुई बारिश से गंगा समेत रामगंगा और अन्य क्षेत्रीय नदियों में उफान बढ़ने के संकेत हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में दवाओं का वितरण नहीं होने से मलेरिया, वायरल फीवर, पेचिश आदि बीमारियां ग्रामीणों को परेशान कर रही हैं।
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धुवला करीमनगर जाकर बाढ़ पीड़ितों से मिले विधायक प्रिंस
जैतीपुर क्षेत्र के गांव धुवला करीमनगर में राम गंगा नदी का कहर बढ़ता जा रहा है।
नदी इतनी तेजी से कटान कर रही है कि गांव संकट में आ गया है ग्रामीणों की सूचना परा क्षेत्रीय विधायक वीर विक्रम सिंह प्रिंस ने गांव पहुंचकर मौका मुआयना किया। कटान रोकने के लिए ग्रामीणों को आवश्यक सामग्री मुहैया कराई। इससे पहले विधायक ने गंगा नदी का कटान रोकने के हवन-पूजन किया उसके बाद अधिकारियों से संपर्क कर कटान रुकवाने हेतु बांध लगवाने का कार्य शुरू कराया। ग्रामीणों ने विधायक से कहा कि पिछले वर्ष भी गंगा नदी ने तेजी से कटान किया था, जिससे आधे गांव के लोगों के खेत नदी में समा गए और यदि इसी तरह से कटान होता रहा तो गांव का अस्तित्व मिट जाएगा। विधायक ने कहा कि गांव की हर समस्या में वह उनके साथ हैं और उनके साथ किसी भी स्तर से शोषण नहीं होने दिया जाएगा। इस दौरान जगवीर सिंह, गजेंद्र प्रताप सिंह, अशोक कुमार गुप्ता, राजीव कुमार गुप्ता, अनुराग सिंह भुवनेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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मिर्जापुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पनप रहीं बीमारियां
मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा-रामगंगा नदियों के तटवर्ती गांवों में बाढ़ से प्रभावित परिवारों को गांव के गलियारों में भरे बरसाती पानी की सड़ांध से बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन बचाव और राहत कार्यों का जिम्मा संभाले कर्मचारी उन्हें दवाएं उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। ग्राम इस्लामनगर, आजाद नगर, चौरा, पैलानी उत्तरी, कटैला नगला, बटन नगला, पहरूआ, मौजमपुर, हरिहरपुर, कुनिया, मई खुर्दकलां, भरतापुर, चिकटिया, पहाड़पुर आदि गांवों में वायरल, डायरिया, जुकाम, खांसी, खुजली, मलेरिया आदि रोगों का प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीणों ने बताया कि अभी तक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का कोई डाक्टर तो दूर कर्मचारी तक गांवों में नहीं आया है। सीएचसी जरीनपुर के चिकित्साधिकारी डॉ. फुरकान अली के अनुसार बाढ़ के बाद खाज, खुजली, मलेरिया बुखार और डायरिया आदि के मरीज बढ़ गए हैं। इस समय प्रतिदिन डेढ़ सौ से अधिक रोगी आ रहे हैं।
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परौर क्षेत्र में रामगंगा समाई सैकड़ों बीघा कृषि भूमि
परौर समेत आसपास के गांवों में रामगंगा करीब दो वर्ष से बरसात के दौरान अनवरत रूप से कटान करती है। रामगंगा के किनारे बसे गांवों के हरीराम कश्यप, मुलायम कुशवाहा, चुन्नीलाल, रामवीर कुशवाहा, रामचंद्र, हरिनाथ सिंह, जयवीर सिंह चौहान, हरिपाल प्रजापति, नत्थू खां, सालिगराम, सत्यपाल सिंह, महिपाल सिंह, कृष्णपाल सिंह, दोदराम कन्हैया लाल, धनपाल सिंह, वीरपाल सिंह, भारत सिंह आदि ग्रामीणों के उपजाऊ खेत कटकर नदी में समा चुके हैं। अब रामगंगा ने गांवों की तरफ रुख मोड़ा तो ग्रामीणों के होश उड़ गए हैं। हालांकि, गत अप्रैल से सिंचाई विभाग के अभियंता मोहनपुर बिचपुरी और परौर को बचाने का प्रयास करा रहे हैं, लेकिन नदी का तेज बहाव उन्हें चुनौती दे रहा है।
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