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लक्ष्य के सापेक्ष 34 प्रतिशत हो सकी गेहूं की खरीद

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शाहजहांपुर। गेहूं की सरकारी खरीद के मामले में शासन से निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष जनपद भले ही पिछड़ा हो, लेकिन जिले के अधिकारी प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में जनपद को गेहूं खरीद के मामले में सिरमौर बता रहे हैं। यह अलग बात है कि मूल्य समर्थन योजना के तहत गेहूं की खरीद को सिर्फ पांच दिन बचे हैं। लक्ष्य की तुलना में बमुश्किल 34 प्रतिशत गेहूं खरीदा जा सका।
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बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस वर्ष सूबे के सभी जिलोें में गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य औसतन दो गुना कर दिया है। सरकार की मंशा रही कि सरकारी सेक्टर में जितनी अधिक खरीद होेगी, किसानों की आढ़तियों और बिचौलियों पर उतनी ही निर्भरता घटेगी। कृषि उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए शासन का यह फंडा अफसरों को भी रास नहीं आया, लेकिन पिछले साल के मुकाबले क्रय केंद्रोें की इस बार संख्या कम कर दी गई।
260064 हेक्टेयर रकबा गेहूं से हुआ आच्छादित
इस वर्ष जिले में 260064 हेक्टेयर कृषि रकबा गेहूं की फसल से आच्छादित रहा। मौसम की अनुकूलता इस वर्ष प्रति हेक्टेयर 44.8 क्विंटल औसत उत्पादकता के आधार पर 1146249 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन होने का अनुमान है। इसके बावजूद सकल उत्पादन का बमुश्किल 15 प्रतिशत गेहूं 1635 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर सरकारी सेक्टर को मिल सका।
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बिचौलियों की सेंधमारी से सरकारी खरीद प्रभावित
गत एक अप्रैल को गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होने पर प्रशासन ने बिचौलियों को पूरी प्रक्रिया से दूर रखने के लिए कई उपाय करने के दावे किए। इसके बावजूद बिचौलियों ने किसानों को तुरंत नगद भुगतान और एडवांस के बहाने औने-पौने दामों पर उनकी उपज का बड़ा हिस्सा कब्जा लिया। डीएम नरेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर एसडीएम सदर रामजी मिश्रा ने पांच मई की रात रोजा मंडी में गल्ला आढ़ती कश्मीर सिंह सत्येंद्र सिंह फर्म पर छापा मारकर गलत तरीके से की जा रही गेहूं की खरीद का खेल पकड़ा था। इस दौरान एफसीआई का छापा लगी 109 बोरियों से गेहूं बरामद हुआ। पूछे जाने पर अफसरों को पता चला कि यह गेहूं किसानों से खरीदकर पीडीएस के उपयोग में लाने के लिए अभिलेखों में सरकारी खरीद के तौर पर कन्वर्ट किया जाना था। इस मामले में आढ़ती फर्म के संचालकों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने पर भी आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

चूंकि, जिला गेहूं उत्पादन में पहले से अग्रता बनाए हुए है। इसलिए अधिकारी आंकड़ों के आधार पर खुद अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। इस वर्ष 42.50 लाख क्विंटल लक्ष्य के सापेक्ष 17 लाख क्विंटल गेहूं खरीदा जा सका। डीएम नरेंद्र कुमार सिंह के अनुसार आंकड़े भले ही कम खरीद दर्शाते हो, प्रदेश में जनपद नंबर वन बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इस बार कोशिश रही कि किसानों को बिचौलियाें से बचाया जाए और नियम सम्मत तरीके से खरीद हो। डीएम के अनुसार इन्हीं प्रयासों से गत वर्ष की तुलना में खरीद अधिक हुई।
क्रय एजेंसी वार गेहूं की खरीद (मीट्रिक टन)
0 खाद्य विभाग 15045.55
0 पंचायत सहकारी समितियां 30556.30
0 पीसीएफ 37973.84
0 यूपी एग्रो 7500.00
0 पीसीयू 13485.90
0 एसएफसी 6711.89
0 कर्मचारी कल्याण निगम 2460.55
0 यूपीएसएस 6484.38
0 नेफेड 7836.11
0 नेकॉफ 1663.00
0 भारतीय खाद्य निगम 24217.85
(यह आंकड़े पांच जून को शाम तक हुई खरीद के हैं। बाद के पांच दिनों में दो लाख क्विंटल अतिरिक्त खरीद हुई)

नीलामी प्रक्रिया से किसानों को मिला समर्थन मूल्य
प्राइवेेट सेक्टर में जा रहे गेहूं का किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने के लिए मंडियों में शुरू कराई गई नीलामी प्रक्रिया का तमाम किसानों को सीधा लाभ मिला। साथ ही इससे क्रय केंद्र्रों पर भी गेहूं की खरीद का ग्राफ बढ़ा है। अभी तक विभिन्न क्रय एजेंसियों के माध्यम से 17 लाख क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। शेष पांच दिन में गेहूूं की खरीद और बढ़ने की उम्मीद है। खरीदे गए गेहूं के भंडारण की उचित व्यवस्था कराई जा रही है।
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-सर्वेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व/ प्रभारी अधिकारी, गेहूं खरीद
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