राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की राजघाट (दिल्ली) के अलावा पूरी दुनिया में कहीं दूसरी समाधि है तो वह जगह है रामपुर। इस गांधी समाधि को अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल बनाने की तैयारी की जा रही है।
बापू की अस्थियां 11 फरवरी 1948 को रामपुर लाई गई थीं। अस्थियों का कुछ हिस्सा तो कोसी नदी में प्रवाहित कर दिया और शेष को छह फुट की चांदी के कैप्सूल में रखकर दफन कर दिया और इसको समाधि का रूप दिया गया। रामपुर में बापू की अस्थियां नवाब रजा अली खां लेकर आए थे।
उन्होंने बापू की अस्थियां रामपुर लाने के लिए अष्टधातु का 18 सेर वजन का विशेष कलश तैयार कराया था। बापू की अस्थियां विशेष ट्रेन से रामपुर लाई गई। बापू की अस्थियां जब रामपुर में लाई गई थीं तो उसे देखने और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए जन सैलाब उमड़ा था।
बाद में बापू की कुछ अस्थियां धार्मिक रीति रिवाज के साथ कोसी नदी में विसर्जित कर दी गईं। शेष बची अस्थियों को चांदी के बर्तन में रखकर दफन कर दिया। उसी जगह पर बापू की भव्य समाधि है। गांधी समाधि रामपुर की पहचान है।
इसे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक स्थल बनाने की तैयारी की जा रही है। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी नगरपालिका के पास है। गांधी समाधि के पास अंडरपास बनाने की योजना भी है ताकि यहां आने वाले लोगों को कोई परेशानी न हो। साथ ही स्थान का आकर्षण बढ़े।