संतकबीरनगर। बदलती जीवनशैली और मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के बढ़ते प्रयोग के कारण युवा अनिद्रा की बीमारी के शिकार हो रहे हैं। अनिद्रा की समस्या से युवा ब्लड प्रेशर, शुगर, मनोरोग की चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञ और चिकित्सक भी मोबाइल फोन का इस्तेमाल सीमित और सावधानी से करने की सलाह दे रहे हैं।
अक्सर देखा जाता है कि लोग सुबह आंख खुलने से लेकर देर रात सोने तक मोबाइल के संपर्क में रहते हैं। बच्चे, युवा सहित हर आयु वर्ग के लोग इससे प्रभावित हैं। सर्वाधिक प्रभाव बच्चों और युवाओं में है। मोबाइल से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है। यह हार्मोन नींद को नियंत्रित करता है। बिस्तर में देर रात तक मोबाइल के उपयोग की आदत बनने से सोने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता। जिससे अनिद्रा की समस्या लगातार बढ़ती चली जाती है। परिणामस्वरूप लोग अनिद्रा की बीमारी का शिकार हो जाते हैं।
चिकित्सकों के मुताबिक जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन एक हजार के करीब मरीज आ रहे है। इसमें करीब 20 से 25 मरीज अनिद्रा के शिकार की शिकायत लेकर आ रहे हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रमाशंकर ने बताया कि अच्छी सेहत के लिए पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। लोगों की नींद पूरी न होने पर दिमाग में तनाव बना रहता है। इससे अनिद्रा की समस्या अन्य बीमारियों को भी जन्म देती है।
रक्तचाप, मधुमेह के मामले भी बढ़ रहे हैं। सोने से पूर्व मोबाइल से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। वहीं फिजिशियन डॉ. कुमार सिद्धार्थ का कहना है कि प्रतिदिन ही अनिद्रा की समस्या लेकर मरीज आते हैं। अनिद्रा से युवा व अन्य आयुवर्ग के लोग अवसाद का शिकार भी हो रहे हैं। यह स्थिति गंभीर है। मोबाइल के प्रयोग को सीमित करना आवश्यक है।
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अनिद्रा से दिक्कत
- रक्तचाप और मधुमेह की समस्या।
- हर समय थकान और आलस महसूस करना।
- आंखों पर थकान का बोझ।
- जरूरी चीजों को भूलने की समस्या।
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ऐसे करें बचाव
- बिस्तर में जाने से पहले मोबाइल का उपयोग बंद करें।
- कुछ समय के लिए मेडिटेशन करें और सो जाएं।
- सोने से पहल कैफीन और शराब का प्रयोग न करें।
- अपने कमरे को शांत व अच्छा वातावरण दें।
- समय से सोने की कोशिश करें।