संतकबीरनगर। पशु तस्कर पहले जहां ट्रकों और डीसीएम के जरिए पशुओं को ले जाते थे। वहीं अब बदले हुए ट्रेंड में पशु तस्करी के लिए छोटे वाहनों के साथ ही कंटेनर और डंपर का पशु तस्करी के प्रयोग किया जा रहा है। यह संयोग ही होता है कि पशु बरामद हो जाते हैं। पशु तस्करों के सर्विलांस में पुलिस पूरी तरह से फेल दिख रही है।
गोवंशीय पशुओं की तस्करी के बदले ट्रेंड को पकड़ने में पुलिस नाकाम साबित हो रही है। यह तो संयोग ही था कि दो जगहों पर गाड़ी खराब हुई जिसकी वजह से पशु तस्करी की पोल खुल गई। रविवार को जहां बरदहिया बाजार की भेली मंडी में पशु तस्करों का वाहन पंचर हो गया और उसके ऊॅपर लदे कबाड़ के अंदर छह गोवंशीय पशु मिले। वहीं 27 दिसंबर 2023 को कांटे तिराहे पर पुलिस को देखकर कंटेनर अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गया और पशु तस्करी का खुलासा हुआ। इस दौरान 34 पशु बरामद हुए थे, जिनमें से चार की दम घुटने से मौत हो गई थी।
इस कंटेनर पर मुरादाबाद का नंबर था। पशु तस्करों का आज तक खुलासा नहीं हो सका। रविवार को बरामद हुई पिकअप पर भी अमरोहा का नंबर लगा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात पशु तस्करों के खिलाफ केस दर्ज किया है। लेकिन अब पुलिस को इस बात की आवश्यकता है कि वह पशु तस्करों के बदले हुए ट्रेंड के आधार पर उनके सर्विलांस के ट्रेंड को भी बदले।
सीसीटीवी में कैद हो गए हैं पशु तस्कर
बरदहिया भेली मंडी में पशु तस्करों की गाड़ी जब सुबह पाच बजे के करीब पंचर हुई तो पशु तस्कर वहां पर लगे एक सीसीटीवी में कैद हो गए हैं। सीसीटीवी में यह दिख रहा है कि गाड़ी पंचर होने के बाद दो पशु तस्कर पिकअप के बाईं तरफ से दरवाजा खोलकर बाहर निकल रहे हैं। पहल वह बरदहिया की तरफ भाग रहे थे। लेकिन फिर कोतवाली की तरफ भाग गए। वहीं ड्राइवर सीट पर बैठा पशु तस्करों की पहचान करके उनको पकड़ना अब पुलिस की जिम्मेदारी है।
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देखकर ही पुलिस पहचान जाती थी कि पशु तस्करों के वाहन
ऐसा नहीं है कि पहले पशुओं की तस्करी खुलेआम होती थी। पहले भी पशुओं की यह तस्करी होती थी। पशु तस्कर बड़े-बड़े ट्रकों और डीसीएम में रखकर पशुओं को लेकर जाते थे। ट्रकों में पशुओं के खाने के लिए चारा भी रखा रहता था। चारों तरफ से वाहनों को तिरपाल से इस तरह ढका जाता था कि लगे कि उसमें माल भरा हुआ है। लेकिन पहले की पुलिस इस कदर प्रशिक्षित थी कि वह वाहनों के पहिए के दबाव और उसकी आवाज से इस बात का अंदाजा लगा लेती थी कि इस वाहन के जरिए पशु तस्करी की जा रही है। इसके बाद पशु तस्करों के वाहनों पर पुलिस धावा बोलती थी और उनको पकड़ती थी।
रामजानकी मार्ग से भी निकलते हैं पशु तस्कर
पशु तस्करों की गाड़ियां रामजानकी मार्ग से भी होकर निकलती हैं। यह मार्ग धनघटा होते हुए गोरखपुर की तरफ चला जाता है। इस मार्ग पर कई बार पुलिस और पशु तस्करों के बीच मुठभेड़ हो चुकी है। लेकिन यह रास्ता इन पशु तस्करों के लिए मुफीद इसलिए रहता है, क्योंकि इस मार्ग पर रात में चेकिंग कम होती है।
गोवध से शुरू किया सफर तो बड़ा पशु तस्कर बन गया अरशद
रविवार को कुशीनगर पुलिस के साथ मुठभेड़ में गोली लगने से घायल कोतवाली खलीलाबाद के मोहम्मदपुर कठार गांव का निवासी पशु तस्कर अरशद खान पहले कसाई था। वर्ष 2016 में दुधारा थानाक्षेत्र के साफियाबाद में हुई पशु क्रूरता के मामले में उसके उपर केस दर्ज हुआ। इसके बाद जब पुलिस का दबाव बढ़ा तो उसने अपना कार्यक्षेत्र बदल दिया और गोरखपुर के चौरीचौरा थानाक्षेत्र में जाकर अपना धंधा करने लगे। इस दौरान उसके ऊपर गोवध निवारण अधिनियम के साथ ही सेंध काटने तथा चोरी की घटनाओं आदि में भी इसका नाम सामने आया। 2023 में पुलिस का दबाव बढ़ने के बाद उसने कुशीनगर जनपद को अपना कार्यक्षेत्र बनाया तथा पशुओं से भरी गाड़ियों को पास करवाने के साथ उनको सुरक्षा भी देने लगा। इस दौरान उसने अकूत संपत्ति जमा की उसके ऊपर संतकबीरनगर, गोरखपुर और बस्ती जनपद में कुल 10 केस दर्ज हैं।