धर्मसिंहवा। बृहस्पतिवार को सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए वट सावित्री व्रत रखकर पूजा अर्चना की। महिलाओं ने कथा भी सुनी। यह व्रत बरगद के पेड़ में धागा लपेटकर पति की लंबी आयु के लिए विशेष प्रार्थना किए जाने का पर्व है।
धर्मसिंहवा क्षेत्र सहित जिले के तमाम स्थानों पर सुहागिन महिलाओं ने अखंड सौभाग्य प्राप्त करने के लिए बृहस्पतिवार को वट सावित्री व्रत रखकर वटवृक्ष तथा यमदेव की पूजा की। पौराणिक कथाओं के अनुसार सौभाग्यवती महिलाएं अखंड सौभाग्य प्राप्त करने के लिए यह व्रत रखती हैं। भारतीय संस्कृत में यह व्रत आदर्श नारीत्व का प्रतीक एवं पर्याय बना हुआ है।
बट सावित्री व्रत में वट और सावित्री दोनों का महत्व है। कथा के अनुसार सत्यवान व सावित्री का विवाह हुआ था। इसमें नारद मुनि ने सावित्री को बता दिया था कि सत्यवान अल्पायु है। अतः वह उससे विवाह न करें पर यह जानते हुए भी सावित्री ने सत्यवान से विवाह किया था। कथा के अनुसार जब यमराज सत्यवान की मृत आत्मा लेकर जा रहे थे तो सावित्री पीछे-पीछे जाने लगी। यमराज ने वर मांगने को कहा तो सावित्री ने बुद्धिमता पूर्ण वर मांगा। सावित्री ने यमराज से सत्यवान के पुत्रों की मां बनने का वरदान मांग लिया था। यमराज के तथास्तु कहते ही सत्यवान मृत्यु पास से मुक्त होकर जीवित हो गए। सावित्री को आदर्श मानते हुए भारतीय महिलाएं अनुसरण करते हुए यह व्रत रखती हैं।