धनघटा। हैंसर ब्लाॅक क्षेत्र जिगिना ताल में अतिक्रमण है। 10 किमी दायरा में फैला ताल वर्ष भर पानी से भरा रहता था। अतिक्रमण के चलते ताल सूख रहा है। ताल की अधिकांश भूमि पर अवैध कब्जा करके खेती की जा रही है। ताल क्षेत्र में कुछ लोगों ने स्थायी निर्माण भी शुरू करा दिया है। इससे ताल के अस्तित्व व जल संरक्षण पर संकट है।
पशु पक्षियों के शरणस्थली कहे जाने वाले ताल की भौगोलिक स्थित बदल चुकी है। ताल का अधिकांश भाग अतिक्रमण की चपेट में है। ताल की जमीनों पर अवैध कब्जे के खिलाफ कभी अभियान नही चलाया गया। नतीजा यह कि ताल में अधिकांश क्षेत्रफल में पानी की जगह फसलें लहलहाती है। तहसील प्रशासन समस्या से बेखबर बना हुआ है। जिगिना ताल अब अतिक्रमण के चलते समतल होता जा रहा है।
पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण ताल के अधिकांश हिस्से गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले सूख जाते है। ताल के सूखने से पशु पक्षियों के लिए प्यास बुझाना चुनौती बना हुआ है। पर्यटन के रूप में विकसित होने की अपार संभावनाओं के बीच जिगिना ताल उपेक्षा का शिकार बना है। विदेशी पक्षियों की आवक से गुलजार रहने वाला ताल अब वीरान हो रहा है। वर्षों पूर्व सरयू नदी के छोर से निकला ताल पशु, पक्षियों के लिए प्यास बुझाने का साधन बनता था। आज ताल सूखा पड़ने से पशु पक्षियों के जीवन पर संकट खड़ा हो गया है। क्षेत्र के 25 गांव से अधिक के लोगों के लिए पानी का मुख्य स्रोत रहे ताल उपेक्षित है। कमलगट्टा, सेरकी अब गुजरे समय की बात हो रही है। पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने को कई बार मांग उठी। किंतु सुंदरीकरण कराने की पहल नहीं की जा रही है।
पशुओं को नहीं मिलता चारा
जिगिना ताल पशुओं के चारागाह के रूप में प्रसिद्ध था। ताल के किनारे स्थित गांवों के अनेक पशु हरा चारा पाकर पेट भरते रहते थे। अतिक्रमण के चलते चारागाह भी खत्म हो गए। क्षेत्र के राम सिधारे, जंगली, राम अवध, सुबास, नरसिंह, बंधु चौहान, राधेश्याम का कहना है कि पिछले नौ वर्ष से यह ताल अतिक्रमण का शिकार है। ताल में मकान बनने लगे है। अतिक्रमण पर रोक नहीं लगी तो ताल की पहचान समाप्त हो जाएगी।
जिगिना ताल पर अतिक्रमण की जानकारी नहीं है। लेखपाल से जांच कराई जाएगी। यदि अवैध अतिक्रमण पाया गया तो उसे शीघ्र खाली कराया जाएगा।
- उत्कर्ष श्रीवास्तव, उप जिलाधिकारी धनघटा