संतकबीरनगर। जिले में तेज धूप और लू का कहर तेज हो गया है। 18 घंटे में हीट स्ट्रोक से 36 लोग अस्पताल में भर्ती हुए हैं। इनमें 15 बच्चे भी शामिल हैं। इन सभी का इलाज जिला अस्पताल और सीएचसी में चल रहा है। चिकित्सकों ने एहतियात बरतने का निर्देश दिया है। उधर सीएमओ ने तेज लू से बचाव के लिए गाइड लाइन जारी की है। उन्होंने लोगों से बचकर रहने की अपील की है।
जिला अस्पताल में शनिवार की रात आठ बजे से रविवार की शाम पांच बजे तक कुल 23 मरीज तेज बुखार, उल्टी दस्त से पीड़ित होकर भर्ती हुए हैं, जिसमें 15 बच्चे पीआईसीयू वार्ड में भर्ती हैं। इनकी निगरानी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह कर रहे हैं। यह सभी बच्चे बुखार और उल्टी दस्त की चपेट में हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल के इमरजेंसी में आठ मरीज इलाज के लिए आए हैं। इन सभी को तेज बुखार और उल्टी दस्त शुरू हो गई है। इसके साथ ही सीएचसी मेंहदावल में 11 मरीज उल्टी दस्त व बुखार से पीड़ित होकर भर्ती हैं।
सीएचसी नाथनगर में एक मरीज भर्ती था, जिसे इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। इसी तरह से सीएचसी सेमरियावां में दो मरीज उल्टी दस्त से भर्ती हैं। सीएचसी हैंसर में कोई भी मरीज भर्ती नहीं है। यही हाल सीएचसी सांथा और बेलहर कला का है। इन मरीजों में ज्यादा तर बुजुर्ग शामिल हैं।
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जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि जहां तक हो सके गर्मी से बचकर रहें। संभव हो तो दिन में बाहर न निकलें। अगर निकलें भी तो सिर ढक लें और चश्मा जरूर लगाएं। रोजाना कम से कम छह से सात लीटर पानी जरूर पीएं। गर्म जगह से आकर फ्रीज का पानी न पीएं और तुरंत स्नान न करें। घर से निकलते समय पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। घर में पैरासिटामॉल जरूर रखें। अगर किसी को बुखार हो रहा है तो उसका तापमान जरूर नापें और पट्टी करते रहें। डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा दें।
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लू से बचाव के लिए जारी हुई गाइड लाइन
लू से बचाव के लिए सीएमओ डॉ. अनिरूद्ध सिंह ने गाइड लाइन जारी की है। उन्होंने कहा कि शरीर में पानी की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में पानी का खूब सेवन करें। घर से निकलते समय पूरे शरीर को ढक लें। चाय, काफी, शराब आदि का सेवन न करें। धूप में निकल रहे हैं तो छाते का प्रयोग करें। अगर कोई लू की चपेट में आता है, तो उस पर ठंडी हवा करें। उसके शरीर को गीले कपड़े से पोछें।
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हीट स्ट्रोक के लक्षण
- गर्म लाल शुष्क त्वचा का होना, पसीना न आना।
- तेज पल्स होना।
- उथले श्वास गति में तेजी आना।
- व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति उत्पन्न होना।
- सिरदर्द मितली, थकान और कमजोरी होना तथा चक्कर आना।
- मूत्र न होना अथवा इसमें कमी होना।
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जिला अस्पताल में उल्टी-दस्त व बुखार से 23 लोग भर्ती हैं। उनका इलाज चल रहा है। इनमें 15 बच्चे शामिल हैं। हीट स्ट्रोक से अभी तक अस्पताल में किसी की मौत नहीं हुई है। जो मरीज आ रहे हैं उनका इलाज किया जा रहा है।
-डॉ. महेश प्रसाद, सीएमएस