जिला अस्पताल में मरीज को परामर्श देते डॉक्टर।संवाद
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचने वाली 80 फीसदी महिलाएं आयरन की कमी से जूझ रही हैं। इसका कारण खान पान में लापरवाही बरतना बताया जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि महिलाओं में आयरन की कमी से कमजोरी, चक्कर आना, थकान, सांस फूलना और कार्यक्षमता में कमी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। इसलिए महिलाओं का खान-पान बेहतर होना चाहिए।
चिकित्सकों के अनुसार, सबसे गंभीर स्थिति गर्भवती महिलाओं की है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में खून की आपूर्ति लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। ऐसे में आयरन की कमी मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए खतरा बन सकती है। जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंचने वाली अधिकतर गर्भवतियों में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से काफी कम पाया जा रहा है। जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शशि सिंह ने बताया कि गर्भावस्था के चौथे महीने में ही आयरन का सेवन शुरू कर देना चाहिए। आयरन हीमोग्लोबिन के निर्माण में सहायक होता है, जो शरीर और गर्भ में पल रहे बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाने में सहायक होता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन एक-दो नार्मल या सीजर डिलीवरी की जाती है। आयरन की कमी के चलते प्रसव के दौरान विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है।
डॉक्टर की सलाह से आयरन की खुराक
चिकित्सकों ने महिलाओं को सलाह दी कि प्रसव के बाद भी कम से कम छह महीने तक आयरन का सेवन जारी रखे। हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, चुकंदर, अनार, गुड, सेब के साथ विटामिन-सी युक्त फल आहार में शामिल करें, ताकि आयरन का अवशोषण बेहतर हो सके।