धनघटा। प्रकृति के प्रकोप से इस वर्ष धान की फसल प्रभावित हुई है। कहीं जलभराव के कारण फसल नष्ट हो गई तो कहीं सूखे के कारण धान की पैदावार प्रभावित हुई है। इस वजह से किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा है।
एमबीडी महाबांध के दक्षिण में आगापुर गुलरिहा, खाले पूरवा, गायघाट दक्षिणी, दौलतपुर, सियरकला, चकदहा, भरवटिया, मिठाईलाल पुरवा, नेतवापुर, रामपुर दक्षिणी, जगदीशपुर समेत 32 गांव के लोग निवास करते हैं। इन लोगों की खेती नदी और बांध के बीच स्थित है।
किसान राम सुरेश, रघुवंश, लाल बहादुर, राधेश्याम, लालचंद, रघुवीर, राम शंकर व अन्य का कहना है कि इस वर्ष नदी का जलस्तर तीन बार बढ़ा जिससे बाढ़ के कारण धान की फसल लंबे समय तक पानी में डूबी रही। पानी जब हटा तो धान पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी। दियारा में इस समय धान की फसल नहीं के बराबर है। खेत में केवल खर-पतवार भरा पड़ा है।
दूसरी तरफ बांध के उत्तर में बसे सैकड़ों गांवों के किसानों का दर्द है कि सूखे के कारण फसल रोग ग्रस्त होकर नष्ट हो गई। किसान राम सवारे, लालमन, भीम प्रसाद, राम लौट चौधरी, दयाराम, परमात्मा यादव, रघुवंश, राम संत व अन्य ने बताया कि जो किसान समय-समय पर खेत में पानी चला दिए उनकी फसल तो बच गई।
लेकिन जो लोग पानी चलाने में असमर्थ थे उनकी फसल नष्ट हो गई है। इस संबंध में तहसीलदार राम जी का कहना है कि फसलों का सर्वे कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।