मेंहदावल। क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) में जैविक विधि से उगाई गई सब्जियों का इस्तेमाल हो रहा है। इससे बच्चों को न सिर्फ पोषक भोजन मिलता है, बल्कि उनका दिमाग भी विकसित होता है।
यह संभव हो सका है प्राथमिक शिक्षा विभाग की किचन गार्डन योजना की बदौलत, जो बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए विभाग ने बनाई थी, ताकि बच्चों को हरी सब्जियां खिलाई जाएं और उनको बागवानी का भी प्रशिक्षण मिलता रहे।
प्राथमिक विद्यालय जोरवां के प्रभारी प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार पांडेय ने बताया विद्यालय के गार्डन में तैयार सब्जी का अब भोजन निर्माण में प्रयोग हो रहा है। विद्यालय में पढ़ रहे नौनिहाल अब ताजी गोभी का स्वाद ले रहे हैं। टमाटर में भी फल आ रहे हैं तो वहीं बैंगन के पौधे में फूल लग रहे हैं।
पालक, मेथी, सेम, बीन्स, मूली, पत्तागोभी का इस समय प्रयोग हो रहा है। हरी धनिया पर्याप्त मात्रा में लगाई गई है। तहरी से लेकर सब्जी और दाल में भी इसका प्रयोग किया जाता है। बुधवार, शुक्रवार को तहरी के साथ बच्चों को मूली को सलाद के रूप में दिया जा रहा है।
इस समय मटर भी फलनी शुरू हो गई हैं। अब शीघ्र ही बच्चों को ताजे मटर के दाने भी मध्याह्न भोजन में मिलने शुरू हो जाएंगे। बच्चों द्वारा इन पौधों की अच्छी देखभाल के चलते अच्छा विकास हुआ है। यहां से सीखकर बच्चे अपने घरों में जाकर भी अपने परिजनों को सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। मेंहदावल क्षेत्र के दर्जनों स्कूलों में दिखती है हरियाली : मेंहदावल शिक्षा क्षेत्र के बीईओ ज्ञान चंद्र मिश्रा बताते हैं कि इस क्षेत्र के दर्जनों परिषदीय स्कूलों में सब्जी व फूल उगाए जा रहे हैं। कंपोजिट विद्यालय जमोहरा, नरायनपुर व भटौली, प्राथमिक विद्यालय करहना, नंदौर, अमरडोभा और पिपरी समेत कई विद्यालय हरियाली से लैस हैं। जैविक सब्जी मध्याह्न भोजन का हिस्सा बन रही है। स्कूलों में जमीन के अभाव में यह योजना पूरी तरह से क्रियान्वित नहीं हो पा रही है। जहां जगह है वहां पर सुंदर तरीके से किचन गार्डन संवारे गए हैं। छोटी मोटी दिक्कतों का निवारण करते हुए स्कूलों में किचन गार्डन संवारने के प्रयास किए जाएंगे। स्कूल में बच्चों की उपस्थिति 95 प्रतिशत से अधिक होती है।