जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में हृदय और मानसिक रोगियों के इलाज की सुविधा नहीं है। यहां फिजिशियन ही इन रोगियों को प्राथमिक उपचार दे पाते हैं। कार्डियोलॉजिस्ट और न्यूरो सर्जन जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव में मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहर तक दौड़ लगानी पड़ रही है। इससे रोगियों के साथ ही तीमारदारों को परेशानी होती है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी और ओपीडी में रोजाना औसतन 40 हृदय रोगी व तकरीबन 10 मानसिक रोगी इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट और न्यूरो सर्जन की तैनाती नहीं है। इसलिए ओपीडी में बैठे फिजिशियन इन गंभीर बीमारियों से पीड़ित सामान्य मरीजों का प्राथमिक उपचार कर एहतियात बरतने की सलाह देते हैं। वहीं, गंभीर मरीजों को सीधे गोरखपुर अथवा लखनऊ रेफर कर दिया जाता है।
खलीलाबाद बंजरिया कस्बा निवासी संतोष ने बताया कि उनके पिता हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं। जिला अस्पताल में केवल प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। कभी-कभी ज्यादा दिक्कत होने पर गोरखपुर जाना पड़ता है। इसी तरह बनियाबारी के गुड्डू ने बताया कि हफ्ते भर पहले सड़क हादसे में चचेरे भाई रे सिर पर गंभीर चोट लग गई थी। जिला अस्पताल लाने पर डॉक्टरों ने न्यूरो सर्जन को दिखाने की सलाह दी। इस तरह से देखा जाए तो जिला अस्पताल इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए महज रेफरल सेंटर बन कर रह गया है।
कोट
जिला अस्पताल में फिलहाल कार्डियोलॉजिस्ट और न्यूरो सर्जन की तैनाती नहीं है। फिर भी यहां आने वाले रोगियों का प्राथमिक उपचार किया जाता है। ज्यादा गंभीर होने पर मरीज को गोरखपुर और लखनऊ रेफर किया जाता है।
-डॉ. रामानुज कन्नौजिया, सीएमओ