कलक्ट्रेट में कोषागार कार्यालय में काम करते कर्मी।
संतकबीरनगर। वित्तीय वर्ष 2024-2025 आज समाप्त हो गया। इसे लेकर जिले के सभी विभागों ने लेखा-जोखा तैयार किया। सरकारी कार्यालयों में सुबह 10 बजे से देर रात तक बजट खर्च करने की होड़ मची रही। कर्मचारियों के वेतन, एरियर और योजनाओं से संबंधित लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेजी गई।
केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से हर साल कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च होने वाले बजट का आवंटन किया जाता है। एक अप्रैल से 31 मार्च तक चलने वाले वित्तीय वर्ष में पूरा लेखाजोखा तय किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी योजनाओं के लिए बचे बजट को खपाने की कोशिश वैसे तो पखवाड़े भर से चल रही थी, लेकिन अंतिम दो दिन रविवार और सोमवार को युद्धस्तर पर काम हुआ।
विकास भवन, बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, सीएमओ कार्यालय, डीआईओएस, लोक निर्माण विभाग, ट्रेजरी समेत अन्य कार्यालयों में बची धनराशि को खर्च करने के लिए अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक दिनभर कार्यालय से बैंक तक का चक्कर काटते रहे। फाइलों में दस्तखत कराने के लिए डीएम कार्यालय से लेकर आवास तक अधिकारी पहुंचे। देर रात तक ट्रेजरी में कार्य होता रहा। विभाग से कितनी रकम सरेंडर हुए और कितनी रकम खर्च हुई इसका लेखा जोखा जोड़ने में कर्मचारी लगे रहे।