विकास भवन में वीवीपैट की जानकारी दी गई।
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संतकबीरनगर। ईवीएम के साथ इस बार सभी बूथों पर प्रयुक्त होने वाली वीवीपैट मशीन बेहद संवेदनशील है। मशीन में आई तकनीकी खराबी को यहां दूर नहीं किया जा सकता। इसलिए चुनाव के दौरान इसके प्रयोग में बरती गई लापरवाही मतदान कर्मियों के साथ-साथ अफसरों के लिए भी मुसीबत का सबब बन सकती है।
यह जानकारी बुधवार को विकास भवन सभागार में मतदान कर्मियों को ईवीएम व वीवीपैट के विषय में व्यावहारिक जानकारी देने के लिए चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद कर्मचारियों को परियोजना निदेशक प्रमोद कुमार यादव ने दी। उन्होंने कहा कि वीवीपैट (वोटर वेरिफेबल पेपर ऑडिट ट्रेल या मतदाता सत्यापन पर्ची) मशीन एक प्रिंटर की तरह कार्य करती है। मतदाता द्वारा ईवीएम में मतदान के लिए बटन दबाते ही वीवीपैट मशीन के स्क्रीन पर छपी पर्ची दिखाई देती है जो सात सेकेंड बाद स्वत: ही नीचे लगे बॉक्स में गिरकर सुरक्षित हो जाएगी। पीडी ने बताया कि मशीन के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ होते ही इसमें खराबी आ जाएगी। पुन: मशीन को चालू होने में 15 मिनट का समय लगेगा। अगर मशीन खराब हुई तो उसे बदलना ही पड़ेगा। इसीलिए चुनाव के दौरान सेक्टर मजिस्ट्रेट की गाड़ी में भी अतिरिक्त वीवीपैट रखवाने का इंतजाम किया जा रहा है। उन्होंने कर्मचारियों से अपील करते हुए कहा कि मतदान ड्यूटी पर जाने से पूर्व इन मशीनों को ऑपरेट करने का कई बार अभ्यास कर लें ताकि दिक्कत न हो।
50 बार होगा मॉक पोल
ईवीएम की सत्यता को प्रमाणित करने के लिए लगाई जा रही वीवीपैट मशीन में इस तरह की सेटिंग की गई है कि वोटिंग शुरू होने से पहले ही एजेंट को पूर्ण विश्वास हो जाए। पीडी ने बताया कि मशीन जब स्टार्ट होगी तो उससे सात पर्ची स्वत: निकलेगी जिस पर ट्रॉयल छपा होगा। इसके बाद 50 बार मॉक पोल किया जाएगा। इस तरह वोटिंग से पूर्व वीवीपैट के डिब्बे में कुल 57 पर्ची होगी। इसको गिनकर पहले एक अलग लिफाफे में रखा जाएगा और उसके बाद मशीन को वोटिंग के लिए तैयार किया जाएगा।