सरयू नदी के बिडहर घाट पर साफ सफाई करते कर्मचारी
धनघटा। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर श्रद्धालु सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर पहुंचकर गोता लगाने के बाद दान देंगे। बिडहर घाट पर स्नान करने वालों की भारी भीड़ लगती है। सोमवार को पंचायत विभाग घाट की सफाई शुरू करवा दी है।
पंडित रामकृपाल पांडेय का कहना है कि मकर संक्रांति के अवसर पर स्नान, ध्यान, दान का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है। मकर संक्रांति पूरे भारत और नेपाल में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है उस दिन इस पर्व को मनाया जाता है।
इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। तमिलनाडु में इसे पोगल नमक उत्सव के रूप में जाना जाता है। जबकि कर्नाटक, केरल, तथा आंध्र प्रदेश में इसे संक्रांति ही कहते हैं।
बिहार के कुछ जिले में तिला संक्रांति नाम से प्रसिद्ध है। मकर संक्रांति को कही-कही उत्तरायण भी कहते हैं। 14 जनवरी के बाद से सूर्य उत्तर की दिशा की ओर जाता है। मकर संक्रांति के अवसर पर सरयू नदी के बिडहर घाट, रामबाग घाट, मैन्दी, चांदीपुर आदि घाटों पर लोग डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करेंगे।ा