संतकबीरनगर। जनपद में कोडीन कफ सिरप के मामले में अब तक तीन आरोपी पुलिस गिरफ्त में आ चुके हैं। वहीं मामले में अभी अन्य 4-5 लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। पिछले साल नवंबर में खलीलाबाद शहर के शुगर मिल तिराहा, गोला बाजार व भिटवा टोला में औषधि निरीक्षक प्रीती सिंह ने जांच के बाद दो दुकानदारों पर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
छापे के दौरान प्रतिबंधित कोडीन युक्त कोडिवा सिरप 4520 शीशी और 6056 प्रोक्सविन स्पास कैप्सूल बरामद हुआ था। कोडीन कफ सिरप मामले में कोतवाली पुलिस विवेचना कर रही है। विवेचना के जरिये जो नाम प्रकाश में आ रहा है उनको पुलिस गिरफ्तार कर रही है।
औषधि निरीक्षक प्रीती सिंह ने खलीलाबाद शहर के संकल्प मेडिकल स्टोर गोला बाजार और शुगर मिल तिराहा प्रोपरइटर कल्पना पत्नी संतोष कुमार गुप्ता के दुकान पर नवंबर में छापा मारा था। इसके साथ ही लाइफ मेडिकल स्टोर भिटवा टोला प्रोपरइटर मोहम्मद असद के दुकान पर पहुंचकर चेकिंग की थी। दोनों दुकानों पर प्रतिबंधित नशीली दवा मिलने के बाद उसे जब्त कर कोतवाली खलीलाबाद में तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले में विवेचना शुरू की।
औषधि निरीक्षक से मिले साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने अभी तक तीन आरोपी को गिरफ्तार करके जेल भेजा है। जबकि अन्य जो नाम प्रकाश में आ रहा है। पुलिस उन्हें अपने विवेचना में शामिल कर रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार तो अभी भी इस मामले में चार से पांच गिरफ्तारी होने की संभावना बन रहा है। इससे नशीली दवाओं के कारोबार में संलिप्त लोगों की सांस अटकी हुई है।
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नहीं प्रस्तुत कर सके थे क्रय विक्रय से संबंधित दस्तावेज
मेडिकल प्रतिष्ठान पर प्रतिबंधित नशीली दवाएं बरामद होने पर उसे सील करके फर्म प्रोपराइटर के सुपुर्द कर दिया गया था। फर्म संचालिका उक्त दवाओं के क्रय विक्रय के संबंध में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। इसके बाद उन्हें तीन दिन का समय देकर खरीद-फरोख्त के संबंध में दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। फिर भी तय समय सीमा के अंदर भी उनके द्वारा कोई भी अभिलेख औषधि निरीक्षक के समक्ष नहीं प्रस्तुत किया गया।
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लाइफ मेडिकल स्टोर पर फर्जी तरीके से काटे गए थे चालान
औषधि निरीक्षक की जांच में लाइफ मेडिकल स्टोर भिटवा टोला के फर्म स्वामी कोई क्रय अभिलेख नहीं प्रस्तुत कर सकें। मेडिकल स्टोर से सत्यापन करने पर पता चला कि सभी विक्रय चालान फर्जी तरीके से काटे गए। संबंधित मेडिकल स्टोर स्वामियों ने बिल के आधार पर कोई दवा न खरीदने एवं न प्राप्त होने की पुष्टि की थी।